सीएम योगी के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा की थी। इस दौरान अधिकारियों को सभी मामलों का निर्धारित समय में निस्तारण करने के निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि राजस्व मामलों को लटकाने या निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
इसके बाद राजस्व परिषद ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दर्ज मामलों की न्यायालय और अधिकारी स्तर पर समीक्षा कराई। जांच में कुछ अधिकारियों की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
निलंबित अधिकारियों में पवन कुमार सिंह, अतुल हर्ष, हरेराम यादव, आनन्द ओझा और विवेक कुमार सिंह शामिल हैं। इनमें चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार हैं। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अब विभागीय जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
आगे भी जारी रहेगी निगरानी
राजस्व परिषद ने साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल एक बार तक सीमित नहीं रहेगी। लंबित मामलों के निस्तारण की लगातार निगरानी की जाएगी और अधिकारियों की कार्यप्रगति की नियमित समीक्षा होगी। सरकार का उद्देश्य राजस्व से जुड़े मामलों को समय पर निपटाकर किसानों और आम नागरिकों को तेज, पारदर्शी और आसान न्याय उपलब्ध कराना है। निर्धारित समय में मामलों का निस्तारण नहीं करने वाले अधिकारियों पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

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