हाइपरसोनिक मिसाइल का इंजन: सिर्फ 4 देशों के पास

नई दिल्ली। वर्तमान युग में रक्षा तकनीक की दुनिया में हाइपरसोनिक मिसाइलें (Hypersonic Missiles) सबसे क्रांतिकारी और रणनीतिक हथियारों में से एक बन चुकी हैं। ये मिसाइलें ध्वनि की गति से कम से कम पाँच गुना (Mach 5+) तेज चलती हैं और दुश्मन के रडार को चकमा देकर अत्यंत सटीकता से लक्ष्य को भेद सकती हैं। इस तकनीक का मूल आधार है – स्क्रैमजेट इंजन (Scramjet Engine), जो इन मिसाइलों को हवा में ही अत्यधिक उच्च गति प्रदान करता है।

हाइपरसोनिक मिसाइल क्या है?

हाइपरसोनिक मिसाइलें ऐसी प्रक्षेपास्त्र प्रणाली हैं जो मैक 5 (ध्वनि की गति से 5 गुना तेज) या उससे अधिक की रफ्तार से उड़ सकती हैं। इनकी सबसे खास बात यह है कि ये बहुत तेजी से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती हैं, जिससे इन्हें रोकना बेहद कठिन हो जाता है।

स्क्रैमजेट इंजन क्या है?

Scramjet का पूरा नाम है – Supersonic Combustion Ramjet। यह एक अत्याधुनिक एयर-ब्रीदिंग इंजन है, जो हवा में उपलब्ध ऑक्सीजन का उपयोग करके ईंधन जलाता है। यह इंजन तभी काम करता है जब कोई वस्तु पहले से सुपरसोनिक गति (मैक 3+) से चल रही हो। इसके कारण यह पारंपरिक रॉकेट इंजन की तुलना में अधिक कुशल और हल्का होता है।

वो चार देश जिनके पास स्क्रैमजेट तकनीक है

1 .अमेरिका – X-51A Waverider, और DARPA के प्रोजेक्ट्स।

2 .रूस – Avangard HGV और Zircon हाइपरसोनिक मिसाइल।

3 .चीन – DF-ZF (पूर्व में WU-14) और अन्य गुप्त कार्यक्रम।

4 .भारत – DRDO द्वारा विकसित HSTDV (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle)।

भारत की हाइपरसोनिक प्रगति

भारत ने 2020 में HSTDV का सफल परीक्षण किया, जिसमें स्वदेशी स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग किया गया। इसके अलावा, भारत ब्रह्मोस-2 जैसी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल पर भी कार्य कर रहा है जो भारत-रूस सहयोग का हिस्सा है। भारत की यह प्रगति उसे तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्रों की कतार में खड़ा करती है।

0 comments:

Post a Comment