शहरी क्षेत्रों में ड्रोन सर्वेक्षण का उद्देश्य
दरअसल प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में भूमि की बढ़ती मांग, जटिल स्वामित्व संबंधी विवाद और अनियमित कालोनियों की वजह से एक सटीक भूमि रिकार्ड प्रणाली की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। ड्रोन सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य है:
शहरी भूमि का सटीक मापन।
संपत्ति की वास्तविक स्थिति का निर्धारण।
भू-स्वामित्व से संबंधित विवादों में कमी लाना।
भूमि खरीद व बिक्री में धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
कालोनियों और शहरों के डिजिटल नक्शे तैयार करना।
भूमि की उपलब्धता और स्वामित्व की स्पष्ट जानकारी देना।
पहले चरण में शामिल शहर
ड्रोन सर्वेक्षण के पहले चरण में प्रदेश के 10 शहरों को शामिल किया गया है: टांडा, नवाबगंज, अनूपशहर, चित्रकूट धाम, गोरखपुर, हरदोई, झांसी, चुनार, पूरनपुर और तिलहर। इन शहरों में जल्द ही ड्रोन उड़ानें शुरू कर दी जाएंगी और वहां के भू-स्वामित्व, निर्माण और भौगोलिक विशेषताओं का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा।
उच्चस्तरीय तैयारी और प्रशिक्षण
इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारी की जा रही है। भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी और संयुक्त सचिव कुनाल सत्यार्थी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर ड्रोन सर्वेक्षण की तैयारियों की समीक्षा की। ड्रोन सर्वेक्षण पूरा करने वाले नगरीय निकायों को ₹10 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी, ताकि वे इस तकनीक को अपनाने और लागू करने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
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