भारत के ब्रह्मोस मिसाइल में कौन सा इंजन लगा हैं?

नई दिल्ली। भारत और रूस के सामरिक सहयोग से विकसित की गई ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक मानी जाती है। इसकी खासियत सिर्फ इसकी रफ्तार नहीं, बल्कि इसकी अत्याधुनिक प्रणोदन प्रणाली (propulsion system) है, जिसमें एक शक्तिशाली रैमजेट इंजन लगा है जो इसे मैक 2.8 से मैक 3 की रफ्तार से उड़ने में सक्षम बनाता है।

ब्रह्मोस मिसाइल का इंजन दो चरणों में कार्य करता है:

पहला चरण – ठोस ईंधन बूस्टर (Solid Rocket Booster):

प्रारंभिक गति और ऊँचाई प्राप्त करने के लिए एक ठोस ईंधन से संचालित रॉकेट बूस्टर लगाया गया है। यह मिसाइल को तेज़ी से उड़ान भरने में मदद करता है।

दूसरा चरण – रैमजेट इंजन (Liquid Fuel Ramjet):

रैमजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर उसे ईंधन के साथ मिलाकर उच्च गति उत्पन्न करता है। यह तकनीक मिसाइल को बिना भारी ऑक्सीजन टैंक के सुपरसोनिक गति से लगातार उड़ने की क्षमता देती है।

रूस की तकनीक, भारत का आत्मनिर्भर कदम

ब्रह्मोस मिसाइल में उपयोग होने वाला मूल रैमजेट इंजन रूस की NPO Mashinostroyeniya द्वारा विकसित किया गया है, लेकिन भारत ने पिछले कुछ वर्षों में इसमें कई स्वदेशी बदलाव किए हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) भी अब पूरी तरह स्वदेशी रैमजेट इंजन विकसित करने की दिशा में कार्यरत है।

ब्रह्मोस NG: अगली पीढ़ी की मिसाइल

भारत अब ब्रह्मोस का अगला संस्करण "ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन" (BrahMos-NG) तैयार कर रहा है, जिसमें हल्का वजन और अधिक रेंज के साथ वही शक्तिशाली रैमजेट इंजन रहेगा। यह संस्करण वायुसेना के छोटे फाइटर जेट्स से भी दागा जा सकेगा।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर

ब्रह्मोस मिसाइल का इंजन और तकनीक न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ा रही है, बल्कि स्वदेशीकरण के जरिए ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी मजबूती दे रही है। आने वाले समय में भारत ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों का उत्पादन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से करने की दिशा में अग्रसर है।

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