अमेरिका ने चीन पर लगाया 100% टैरिफ, व्यापार युद्ध शुरू

न्यूज डेस्क। अमेरिका ने चीन से आयातित सभी उत्पादों पर 1 नवंबर से 100% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह कदम पहले से लागू टैरिफ के ऊपर अतिरिक्त भार होगा और अमेरिका की चीन के प्रति कड़ी व्यापार नीति को दर्शाता है। इस फैसले के पीछे चीन द्वारा रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ पृथ्वी तत्व) के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों का प्रतिकार है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।

चीन का रुख और अमेरिका की प्रतिक्रिया

चीन ने हाल ही में विश्व बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अपनी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की सूची में पांच नए तत्व जोड़ दिए हैं, जिन पर अब वे कड़े नियंत्रण लगाना चाहते हैं। ये तत्व तकनीकी और सैन्य उपकरणों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही चीन ने माइनिंग, स्मेल्टिंग और चुंबक उत्पादन की तकनीकों पर भी एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग लागू कर दी है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है ताकि सामग्रियों का सैन्य और संवेदनशील क्षेत्रों में गलत उपयोग न हो।

ट्रंप का कड़ा संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन की इस नीति को बेहद शत्रुतापूर्ण करार दिया है और इसे व्यापार युद्ध की एक नई चाल बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन ने 1 नवंबर से लगभग हर उत्पाद पर भारी एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने की योजना बनाई है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा। इसी के जवाब में अमेरिका ने 100% टैरिफ लगाने और सभी सॉफ्टवेयर पर भी एक्सपोर्ट कंट्रोल लागू करने का निर्णय लिया है।

बैठक और आगे की रणनीति

ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन के साथ उनकी मुलाकात की योजना पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि व्यापारिक तनाव की वजह से यह बैठक हो भी सकती है और नहीं भी। उन्होंने यह भी बताया कि अगर चीन अपने एक्सपोर्ट कंट्रोल को वापस लेता है, तो अमेरिका टैरिफ में छूट देने पर विचार करेगा, लेकिन फिलहाल यह स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।

वैश्विक व्यापार पर प्रभाव

चीन की यह कदम और अमेरिका की प्रतिक्रिया दोनों ही वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही हैं। दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का वैश्विक उत्पादन चीन के नियंत्रण में है, जिससे अमेरिका जैसे देश भारी दबाव में हैं। इस टैरिफ युद्ध के चलते दोनों देशों के उद्योगों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, विशेषकर तकनीकी, रक्षा और सॉफ्टवेयर सेक्टर में।

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