कौन हैं जेट इंजन सुपरपावर देश?
1 .अमेरिका: दुनिया की सबसे एडवांस एविएशन टेक्नोलॉजी का केंद्र है अमेरिका। यहां की कंपनियां जैसे GE Aviation और Pratt & Whitney एफ-35 जैसे स्टील्थ फाइटर के इंजन बनाते हैं।
2 .रूस: बता दें की रूस अपने Sukhoi और MiG फाइटर्स के लिए खुद इंजन बनाता है, Saturn AL-31, AL-41 जैसे इंजन इसी की देन हैं।
3 .फ्रांस: फ़्रांस भी जेट इंजन बनाने में आगे हैं। Safran कंपनी द्वारा विकसित M88 इंजन Dassault Rafale के लिए प्रमुख है।
4 .ब्रिटेन: दुनियाभर में जेट इंजन बनाने में ब्रिटेन का Rolls-Royce सबसे विख्यात हैं, टाइफून और अन्य जेट्स के लिए इंजन बनाता है।
5 .चीन: हाल के वर्षों में चीन ने इसमें भारी निवेश और रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए अब WS-10 जैसे स्वदेशी इंजन बना रहा है।
भारत की स्थिति: सपना अभी अधूरा
भारत ने अब तक अपने लड़ाकू विमानों जैसे Tejas में विदेशी जेट इंजन (GE F404/F414) का इस्तेमाल किया है। हालांकि, भारत ने भी अपने खुद के इंजन पर काम शुरू कर दिया है। GTRE (Gas Turbine Research Establishment) द्वारा विकसित किया गया 'कावेरी इंजन' इसका बड़ा उदाहरण है।
लेकिन यह प्रोजेक्ट अब तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। परीक्षणों में धक्का लगने के बाद यह इंजन अभी सीमित उपयोग और अनुसंधान के दायरे में है। भारत अब "कावेरी इंजन" को रिवाइव करने के साथ-साथ फ्रांस की Safran कंपनी के साथ संयुक्त विकास की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। इसके अलावा, भारत का DRDO और HAL अब फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए इंडिजिनस इंजन पर काम तेज कर चुके हैं।

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