पराली लगाने को लेकर क्यों है सख्ती जरूरी?
पराली जलाना लंबे समय से एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बना हुआ है। इससे निकलने वाला धुआं न सिर्फ वायु प्रदूषण बढ़ाता है, बल्कि सांस और त्वचा संबंधी रोगों को भी जन्म देता है। खासकर त्योहारों और सर्दी के मौसम में यह समस्या और विकराल रूप ले लेती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक कृषि व्यवहार नहीं, बल्कि एक सामाजिक और स्वास्थ्य संकट है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जुर्माने की दरें तय: अब लापरवाही भारी पड़ेगी
सरकार ने इस बार पराली जलाने वालों के लिए वित्तीय दंड तय कर दिया है: दो एकड़ से कम भूमि पर पराली जलाने पर ₹2,500 का जुर्माना, दो से पांच एकड़ तक के लिए ₹5,000 का जुर्माना, पांच एकड़ से अधिक खेत में जलाने पर ₹15,000 का जुर्माना। यह जुर्माना "पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति" के रूप में वसूला जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घटनास्थल पर ही जुर्माने की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि किसानों में इसका सीधा असर दिखे।
नोडल अधिकारी होंगे तैनात, 24x7 निगरानी
हर 50 से 100 किसानों के बीच एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति का आदेश दिया गया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे पराली जलाने की रोकथाम सुनिश्चित करें और जरूरत पड़ने पर मौके पर जाकर कार्रवाई करें। साथ ही, सेटेलाइट के जरिए निगरानी रखने के निर्देश भी सभी जिलाधिकारियों को दिए गए हैं। हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
प्रदेश के किसानों को दिए जाएंगे विकल्प
योगी सरकार का जोर सजा देने से पहले जागरूकता और समाधान देने पर भी है। कृषि विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों को किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों जैसे: मल्चर और रोटावेटर का उपयोग, बायोडीकंपोजर का छिड़काव, कंपोस्ट बनाने की तकनीक। इनके बारे में जागरूक करने और प्रशिक्षण देने का भी निर्देश जारी किया गया है।
विभागों को सामूहिक जिम्मेदारी
पराली जलाने की रोकथाम केवल कृषि विभाग की जिम्मेदारी नहीं रहेगी। अब राजस्व, पुलिस, ग्राम्य विकास, पंचायती राज और स्थानीय प्रशासन को भी इसमें सहभागी बनाया गया है। जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर समन्वय बनाकर खेतों की निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

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