भारत की बड़ी चाल, अमेरिका सन्न, चीन के भी उड़े होश!

नई दिल्ली। भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से अटकी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ता अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पक्ष दिसंबर 2025 तक इस सौदे को फाइनल करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। दिल्ली और ब्रुसेल्स में अधिकारियों के बीच अंतिम राउंड की तैयारी जोरों पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह डील समय पर पूरी हुई, तो भारत के मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा।

व्यापार में यूरोप की अहमियत

भारत और ईयू का द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में लगभग 136.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें भारत से निर्यात 75 अरब डॉलर और आयात लगभग 60 अरब डॉलर का रहा। यूरोपियन यूनियन भारत का सबसे बड़ा मर्चेंडाइज ट्रेड पार्टनर है। एफटीए के लागू होने के बाद मेड-इन-इंडिया प्रोडक्ट्स को यूरोपीय बाजार में टैक्स छूट और बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

किन मुद्दों पर चल रही है कड़ी लड़ाई

इस डील में कुल 23 चैप्टर शामिल हैं, जिनमें सर्विस सेक्टर, निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार और रूल्स ऑफ ओरिजिन जैसे महत्वपूर्ण विषय हैं। यूरोप की मांग है कि भारत ऑटोमोबाइल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में उन्हें मार्केट एक्सेस दे। वहीं भारत चाहता है कि उसकी फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रीकल्चर उत्पादों को यूरोपीय बाजार में आसान प्रवेश मिले। नियम और सर्टिफिकेशन के मसलों पर भी बातचीत जारी है।

दिसंबर तक साइनिंग या लंबी खिंचाई?

सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक डील को फाइनल करना है। अगर यह समय सीमा पूरी नहीं होती, तो इसे अगले साल तक टालना पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि भारत की ग्लोबल इकॉनमी में स्थिति को मजबूत करने वाला कदम साबित हो सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस डील से भारत को न केवल यूरोपियन मार्केट में नई संभावनाएं मिलेंगी, बल्कि अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सामने भी भारत की महत्वाकांक्षा को मजबूती मिलेगी। अमेरिकी और चीनी कंपनियों के लिए यह संकेत है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में और सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

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