शोर अमेरिका का...खेल भारत का — अब पूरा विश्व हैरान है!

नई दिल्ली। 2025 की दूसरी तिमाही ने वैश्विक व्यापार पर कई मायनों में निर्णायक प्रभाव डाला है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन की हालिया रिपोर्ट न सिर्फ ट्रेड ग्रोथ के मजबूत आंकड़े पेश करती है, बल्कि यह भी बताती है कि अमेरिका की टैरिफ-आधारित नीतियां उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। खासकर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने न सिर्फ स्थिरता बनाए रखी, बल्कि रणनीतिक तरीके से अमेरिकी दबाव के बीच अपनी स्थिति और मजबूत कर ली।

शोर अमेरिका का, खेल भारत का

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने व्यापार में संरक्षणवादी रवैया अपनाते हुए कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए। अनुमान था कि इससे वैश्विक व्यापार प्रणाली डगमगा जाएगी। लेकिन UNCTAD की रिपोर्ट कहती है कि ग्लोबल ट्रेड ने अपेक्षाकृत स्थिरता दिखाई, और सबसे खास बात भारत की अमेरिका पर व्यापारिक निर्भरता में 0.6% की वृद्धि दर्ज की गई। इसका सीधा मतलब है: अमेरिका की सख्ती के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट इकोसिस्टम दबा नहीं, बल्कि धीरे-धीरे और गहरा हुआ।

रूस और भारत के रिश्ते और मज़बूत

भारत को लेकर एक और दिलचस्प आंकड़ा UNCTAD ने साझा किया की रूस की भारत पर व्यापारिक निर्भरता 0.7% तक बढ़ी है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति में रूस पश्चिमी देशों से दूर हो रहा है, भारत उसके लिए एक भरोसेमंद पार्टनर बनकर उभरा है। इससे भारत की रणनीतिक और भौगोलिक स्थिति का महत्व और भी बढ़ जाता है।

दूसरी तिमाही में बदला समीकरण

UNCTAD की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की दूसरी तिमाही में अमेरिका की व्यापार नीतियों में बदलाव का असर साफ दिखा। व्यापार में वैश्विक असंतुलन में कमी आई, लेकिन कुछ प्रमुख देशों भारत, जापान और ब्रिटेन के ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोतरी हुई। यह बताता है कि इन देशों की घरेलू मांग में तेजी है और वे वैश्विक सप्लाई चेन से मजबूती से जुड़े हुए हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स बना ड्राइविंग फोर्स

ग्लोबल ट्रेड की रीढ़ अब भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ही बना हुआ है। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल, जिनमें हाइब्रिड व इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। भारत, जो कि इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत तेजी से आगे बढ़ रहा है, इस बदलती मांग का लाभ उठा सकता है।

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