यूपी में इन श्रमिकों को लेकर बड़ा अपडेट, तुरंत पढ़ें!

रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार विकासखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत कार्यरत श्रमिकों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। अब सभी मनरेगा श्रमिकों को ई-केवाईसी अनिवार्य रूप से कराना होगा। यह कदम योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और फर्जी भुगतान की शिकायतों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

ई-केवाईसी क्यों है जरूरी?

खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सुनील कुमार सिंह के अनुसार, योजना में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां मृत व्यक्तियों या शहरों में रह रहे लोगों के नाम पर जॉब कार्ड के जरिए भुगतान कराया गया। इन अनियमितताओं को रोकने के लिए ई-केवाईसी एक प्रभावी उपाय के रूप में सामने आया है। अब बिना ई-केवाईसी के न तो श्रमिकों को कार्य दिया जाएगा और न ही भुगतान किया जाएगा।

कितने श्रमिक होंगे प्रभावित?

विकासखंड की 54 ग्राम पंचायतों में कुल 25,170 जॉब कार्ड धारक हैं, जिनमें से 17,556 श्रमिक वर्तमान में मनरेगा के अंतर्गत विभिन्न कार्यों में लगे हुए हैं। इनमें अमृत सरोवर की खुदाई, चक मार्ग निर्माण, इंटरलॉकिंग, सड़क और नालियों का निर्माण जैसे अनेक कार्य शामिल हैं।

जिम्मेदारियों का बंटवारा

सभी ग्राम पंचायतों में कार्यरत रोजगार सेवक और महिला मेठ को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे मनरेगा मोबाइल एप के माध्यम से श्रमिकों का सत्यापन कर ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कराएं। ब्लॉक स्तर पर अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है, जो इस कार्य की निगरानी करते हुए नियमित प्रगति रिपोर्ट कार्यालय को भेजेंगे।

कब तक पूरी करनी होगी प्रक्रिया?

प्रशिक्षण के बाद सभी जिम्मेदार अधिकारियों को एक माह के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। ई-केवाईसी पूर्ण होते ही श्रमिकों का कार्य दिवस दर्ज किया जा सकेगा और उसी के आधार पर भुगतान होगा।

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