ट्रैफिक का बढ़ता दबाव बना वजह
लखनऊ-सीतापुर हाईवे पर बीते कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। हालिया सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि इस मार्ग से प्रतिदिन 38,000 से अधिक हल्के और भारी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क की मौजूदा चौड़ाई ट्रैफिक को संभालने में अब नाकाफी साबित हो रही है। खासकर मामपुर इंटौजा जैसे क्षेत्रों में जाम और दुर्घटनाओं की आशंका तेजी से बढ़ती जा रही है।
बिना भूमि अधिग्रहण के होगा चौड़ीकरण
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क को चौड़ा करने के लिए जो योजना बनाई है, उसमें सबसे राहत की बात यह है कि जमीन अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ेगी। सड़क के दोनों ओर पहले से मौजूद खाली जमीन का उपयोग करके ही इस परियोजना को अंजाम दिया जाएगा। इससे समय की बचत तो होगी ही, साथ ही परियोजना की लागत भी कम आएगी क्योंकि अधिकतर खर्च जमीन खरीदने में ही होता है।
डीपीआर के बाद काम को मिलेगी रफ्तार
एनएचएआई ने सर्वे के जरिए ज़रूरी जानकारी जुटा ली है और अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। रिपोर्ट के मंजूर होते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और निर्माण कार्य भी जल्द ही धरातल पर दिखाई देने लगेगा। अधिकारियों का दावा है कि बिना भूमि अधिग्रहण के यह प्रोजेक्ट 1 से 1.5 साल में पूरा किया जा सकता है।
भविष्य की जरूरतों के अनुसार कदम
एनएचएआई का यह कदम न केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में है, बल्कि यह भविष्य के ट्रैफिक लोड को देखते हुए भी तैयार किया गया है। छह लेन की यह सड़क आने वाले दशकों तक वाहन चालकों को सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देगी।
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