इस योजना के तहत प्रदेशभर के एक लाख से अधिक छात्र अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन करेंगे। यह बदलाव ‘नई शिक्षा नीति (NEP–2020)’ के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य बच्चों को अवधारणात्मक और अनुभवात्मक शिक्षा देना है।
कक्षा 1 से 4 तक चरणबद्ध रूप में लागू हो रहा नया पाठ्यक्रम
बेसिक शिक्षा विभाग पहले ही कक्षा 1 और 2 में पिछले सत्र से NCERT का पाठ्यक्रम लागू कर चुका है, जबकि कक्षा 3 के छात्र वर्तमान सत्र (2025–26) में नई किताबों से पढ़ाई कर रहे हैं। अब कक्षा 4 के लिए भी यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए विभाग ने कक्षा 1 से 4 तक की नई किताबों और वर्कबुक्स के पब्लिकेशन और फ्री डिस्ट्रीब्यूशन के लिए एक नया टेंडर जारी किया है। सभी किताबें 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले छात्रों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
कक्षा 4 के लिए नई किताबों की सूची
कक्षा 4 के बच्चों को अब निम्नलिखित नई NCERT किताबें और वर्कबुक्स दी जाएंगी। वीणा (हिंदी), संतूर (अंग्रेजी), गणित मेला (गणित), हमारा अद्भुत संसार (पर्यावरण अध्ययन), संस्कृत सुधा (संस्कृत), बांसुरी (कला शिक्षा), रियाज़ी (उर्दू), इन किताबों को राज्य शिक्षा संस्थान, अंग्रेजी भाषा शिक्षण संस्थान और राज्य हिंदी संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा स्थानीय संदर्भों के अनुसार अनुकूलित किया जा रहा है। अंतिम रूप देने से पहले NCERT से फाइनल अप्रूवल लिया जाएगा।
शिक्षक नहीं अपना रहे डिजिटल टीचिंग टूल्स
जहां एक ओर सरकार नई किताबों और पाठ्यक्रम से शिक्षा स्तर सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर कई शिक्षक अब भी डिजिटल टूल्स का उपयोग करने से परहेज कर रहे हैं। स्मार्ट क्लासरूम, ICT लैब और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद, कई स्कूलों में उनका उपयोग बेहद कम है। शिक्षक पारंपरिक पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षण पर निर्भर हैं, जिससे छात्रों को डिजिटल शिक्षा के लाभ नहीं मिल पा रहे हैं।
7,000 से अधिक स्मार्ट क्लासरूम, लेकिन उपयोग सीमित
राज्य सरकार ने बीते दो वर्षों में शिक्षा के आधुनिकीकरण पर बड़ा निवेश किया है। 7,409 स्मार्ट क्लासरूम, 4,686 ICT लैब, 570 डिजिटल लाइब्रेरी, स्थापित की गईं हैं, लेकिन कई जगहों पर ये संसाधन सिर्फ नाम मात्र के उपयोग में हैं। विद्यालयी शिक्षा निदेशिका मोनिका रानी ने सभी जिलाधिकारियों और बीएसए को निर्देश दिया है कि हर जिले में डिजिटल उपयोग में पिछड़े 10 स्कूलों की पहचान की जाए। इन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग क्यों नहीं हो रहा।
सरकार ने सख्त की निगरानी, ताकि छात्रों को मिले पढ़ाई की सुविधा
महानिदेशक ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन से उपलब्ध कराए गए संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा की जाएगी। विभाग अब यह भी देखेगा कि स्मार्ट क्लास, ICT लैब और डिजिटल सामग्री का विद्यार्थियों की शिक्षा पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ रहा है।

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