यूपी में "शिक्षकों" की ऑनलाइन हाजिरी पर बड़ा अपडेट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेसिक स्कूलों के पठन-पाठन को बेहतर बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार न सिर्फ स्कूलों को संसाधनों से लैस कर रही है बल्कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इस दिशा में आनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने का नियम लागू किया गया है, जिससे शिक्षकों की हाजिरी की पारदर्शिता बढ़ेगी। लेकिन, वर्तमान में शिक्षकों की इस प्रक्रिया में रुचि बेहद कम देखने को मिल रही है।

शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति में भारी कमी

राज्य परियोजना कार्यालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में कुल 1,32,643 स्कूलों में लगभग 6,12,642 शिक्षक हैं, लेकिन पहली पाली में केवल 93 और दूसरी पाली में सिर्फ 58 शिक्षकों ने ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कराई है। यह संख्या कुल शिक्षकों का महज 0.01 प्रतिशत ही बनती है। वहीं, विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति 16.79 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो शिक्षकों की उपस्थिति के मुकाबले काफी अधिक है।

जिलेवार स्थिति चिंताजनक

प्रयागराज जिले में 2,839 स्कूल और 15,264 शिक्षक हैं, लेकिन पहली पाली में केवल 4 और दूसरी पाली में 1 शिक्षक ने ही ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की। इसके अलावा, चित्रकूट, फर्रुखाबाद, बदायूं, हाथरस, लखनऊ, हरदोई, सीतापुर जैसे जिलों में भी शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी न के बराबर है। कई जिलों में तो एक भी शिक्षक ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है, जो शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय है।

विभाग की सख्ती और प्रयास

बेसिक शिक्षाधिकारी प्रयागराज देवव्रत सिंह का कहना है कि शिक्षक अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने और दूसरों के लिए प्रेरणा बनने के लिए शत प्रतिशत ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करें। इस दिशा में विभाग ने टैबलेट और सिमकार्ड भी शिक्षकों को उपलब्ध कराए हैं ताकि तकनीकी समस्या न आए। उनका मानना है कि इस कदम से शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और कार्यशैली में सुधार होगा।

छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति बेहतर

जहां शिक्षकों की उपस्थिति न्यूनतम है, वहीं विद्यार्थियों की ऑनलाइन हाजिरी की स्थिति बेहतर है। सीएम डैस बोर्ड में ऑनलाइन उपस्थिति को शामिल किया गया है, जिसके आधार पर जिलों की रैंकिंग भी की जाती है। आंकड़ों के अनुसार, प्रयागराज मंडल में विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति 50.19 प्रतिशत है, जो प्रदेश में सबसे अच्छी स्थिति है। कौशांबी में यह आंकड़ा 85.50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जबकि प्रतापगढ़ में यह 8.8 प्रतिशत ही है।

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