यह सिर्फ मात्रा में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि लेनदेन की संख्या में भी यूपीआई ने अभूतपूर्व प्रगति की है। अक्टूबर में प्रतिदिन औसतन 69.5 करोड़ लेनदेन हो रहे हैं, जो सितंबर के 65.4 करोड़ से 6 प्रतिशत ज्यादा है। खास बात यह है कि अक्टूबर में 20 तारीख तक ही यूपीआई ने 1 लाख करोड़ रुपये के दैनिक लेनदेन को छह बार पार किया है, जो पिछले महीने की तुलना में दोगुना है।
त्योहारी सीजन ने बढ़ाई डिजिटल लेनदेन की रफ्तार
त्योहारों का मौसम आने पर खरीदारी, यात्रा और उपहारों पर खर्च में इजाफा होता है और इस बार भी ऐसा ही हुआ। दिवाली की पूर्व संध्या पर यूपीआई ने अकेले एक दिन में 74 करोड़ से ज्यादा लेनदेन दर्ज किए, जो त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं की खरीदारी की गति को दर्शाता है। अक्टूबर में अभी एक हफ्ते से ज्यादा समय बाकी है, लेकिन यूपीआई इस महीने 28 लाख करोड़ रुपये के कुल मासिक लेनदेन के स्तर को पार करने की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जो इसके पिछले रिकॉर्ड 25 लाख करोड़ से कहीं अधिक होगा।
डिजिटल अर्थव्यवस्था में यूपीआई की अहम भूमिका
UPI की शुरुआत 2016 में हुई थी, तब से यह भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है। यह प्लेटफॉर्म बैंकों, फिनटेक कंपनियों और व्यापारियों को जोड़कर त्वरित, सुरक्षित और सस्ते डिजिटल भुगतान की सुविधा देता है। आज यूपीआई देश के लगभग 85 प्रतिशत ऑनलाइन लेनदेन का हिस्सा है, जिससे यह भारत के फिनटेक इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुका है।
डिजिटल भारत को देख रही दुनिया की बड़ी शक्तियां
अक्टूबर का यह रिकॉर्ड न केवल यूपीआई की बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत है, बल्कि यह डिजिटल भारत के सपने को साकार करने में एक बड़ा कदम भी है। आने वाले समय में भी जबतक डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलता रहेगा, यूपीआई का महत्व और विस्तार लगातार बढ़ता रहेगा। इस प्लेटफॉर्म की सफलता भारतीय अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण का बेहतरीन उदाहरण है, जो वित्तीय समावेशन को मजबूती देता है और देश के आर्थिक विकास में नई ऊर्जा भरता है।

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