ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ोतरी और रणनीतिक महत्व
अमेरिका की रोक के बावजूद भारत ने रूस से ऊर्जा आयात बढ़ाया है। रूस से आने वाले खनिज ईंधन जैसे कच्चा तेल और कोयला भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के रूस से आयात में खनिज ईंधन का हिस्सा 56.9% तक पहुंच गया, जो पिछले साल से और अधिक बढ़ोतरी दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की रूस पर निर्भरता बढ़ रही है।
रक्षा सहयोग का नया आयाम
ऊर्जा के साथ ही भारत-रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ रही है। विशेष रूप से भारत के S-400 'सुदर्शन' वायु रक्षा प्रणाली के लिए रूस से मिसाइलों की खरीद पर बातचीत चल रही है, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 10,000 करोड़ रुपये है। भारतीय वायु सेना इस प्रणाली को हासिल करके अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाना चाहती है। रक्षा अधिग्रहण परिषद की आगामी बैठक में इस प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाना है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूती देगा।
व्यापारिक विविधता और निर्यात में वृद्धि
भारत ने रूस को अपने निर्यात में भी विविधता लाने का प्रयास शुरू कर दिया है। पारंपरिक ऊर्जा-आधारित व्यापार के अलावा अब कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, रसायन, और मैन्युफैक्चर्ड गुड्स का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। उदाहरण के तौर पर, परमाणु रिएक्टर, मशीनरी, और यांत्रिक उपकरणों के निर्यात में पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग दोगुनी बढ़ोतरी देखी गई है। फार्मास्यूटिकल उत्पादों और कृषि वस्तुओं का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ के बीच चुनौती
भारत की यह व्यापारिक विविधीकरण रणनीति अमेरिका के उन टैरिफों और प्रतिबंधों का जवाब भी है, जो खासकर कपड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और चमड़े के सामान जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों को प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका ने भारत के 60% से अधिक निर्यात पर 50% तक टैरिफ लगा दिए हैं, जिससे भारत को अपने निर्यात बाजारों को स्थिर और विविध बनाना जरूरी हो गया है।
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