आयोग की धीमी शुरुआत, लेकिन नुकसान नहीं
अब तक की जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के लिए न तो सदस्यों की नियुक्ति की है और न ही उसका टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) तैयार किया है। यानी यह भी तय नहीं है कि आयोग किन बिंदुओं पर काम करेगा। यही वजह है कि काम शुरू होने में देरी हो रही है।
हालांकि इससे कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं है। पूर्व के अनुभव बताते हैं कि हर वेतन आयोग को रिपोर्ट तैयार करने में औसतन 12 से 18 महीने लगते हैं। इसके बाद सरकार को उन सिफारिशों की समीक्षा और मंजूरी में 6 से 9 महीने का समय लगता है। इसी प्रक्रिया के कारण आयोग की रिपोर्ट लागू होने में 2 साल तक लग सकते हैं।
देर से लागू हुआ तो भी बकाया मिलेगा
सबसे राहत की बात यह है कि यदि वेतन आयोग की सिफारिशें तय समय पर लागू नहीं हो पाती हैं, तब भी कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान नहीं होगा। केंद्र सरकार आमतौर पर प्रभाव की तिथि से संशोधित वेतन को लागू करती है और उस अवधि का बकाया भी देती है। हाल ही में महंगाई भत्ते (DA) की घोषणा में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी, जिसमें जुलाई 2025 से लागू DA के साथ पिछली तिमाही का एरियर भी जोड़ा गया।
कितनी बढ़ सकती है सैलरी?
रिपोर्ट्स की मानें तो 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों से कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन में 30 से 34% तक की वृद्धि हो सकती है। यह वृद्धि करीब 1.1 करोड़ केंद्र सरकार के मौजूदा और रिटायर्ड कर्मचारियों को प्रभावित करेगी। एम्बिट कैपिटल और कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज जैसे संगठनों ने अनुमान लगाया है कि ये सिफारिशें 2026 की चौथी तिमाही या 2027 की पहली तिमाही तक लागू की जा सकती हैं।
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