भारत और ब्राजील के बीच 10 समझौते, चीन की बढ़ी टेंशन

नई दिल्ली। भारत और ब्राजील के रिश्तों ने नई ऊंचाइयों को छुआ है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई उच्च स्तरीय वार्ता ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक गहराई प्रदान की है। यह मुलाकात केवल औपचारिक कूटनीति नहीं थी, बल्कि भविष्य की आर्थिक और वैश्विक साझेदारी का स्पष्ट खाका भी प्रस्तुत करती है।

व्यापार को नई रफ्तार

दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को 20 अरब डॉलर के पार ले जाने का लक्ष्य तय किया है। वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 15.21 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। यह आंकड़ा बताता है कि भारत और ब्राजील केवल संभावनाओं की बात नहीं कर रहे, बल्कि ठोस आर्थिक प्रगति की दिशा में बढ़ रहे हैं।

भारत के लिए ब्राजील एक प्रमुख साझेदार है। ब्राजील से कच्चा तेल, चीनी, वनस्पति तेल और लौह अयस्क का आयात होता है, जबकि भारत पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयाँ और अन्य औद्योगिक वस्तुएँ निर्यात करता है। व्यापार का यह संतुलन दोनों अर्थव्यवस्थाओं को पूरक बनाता है।

क्रिटिकल मिनरल्स पर रणनीतिक दांव

इस यात्रा का सबसे अहम परिणाम क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स पर हुआ समझौता है। ब्राजील दुर्लभ खनिज भंडार के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल, स्मार्टफोन और रक्षा उपकरण जैसे क्षेत्रों में इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

भारत के लिए यह समझौता विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इससे खनिज आपूर्ति के लिए एकतरफा निर्भरता कम होगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला अधिक लचीली बनेगी। यह कदम ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे चीन की परेशानी बढ़ेगी, क्यों की अभी तक चीन का इसपर राज है। 

10 समझौते: सहयोग का व्यापक दायरा

बैठक के दौरान कुल 10 समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें डिजिटल साझेदारी प्रमुख है। ब्राजील में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना का निर्णय दोनों देशों के तकनीकी सहयोग को नई दिशा देगा।

स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्र में भारत ने सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है। इसके अलावा ऊर्जा, रक्षा, कृषि अनुसंधान, एमएसएमई और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। यह स्पष्ट संकेत है कि संबंध अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि बहुआयामी साझेदारी में बदल रहे हैं।

ग्लोबल साउथ की साझा आवाज है दोनों देश

भारत और ब्राजील दोनों विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने के पक्षधर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग पर दोनों नेताओं ने एकजुटता दिखाई। उनका मानना है कि वैश्विक संस्थाओं में वर्तमान व्यवस्था बदलती वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती।

जब भारत और ब्राजील जैसे बड़े लोकतांत्रिक और उभरती अर्थव्यवस्थाएं साथ खड़ी होती हैं, तो ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज अधिक प्रभावशाली बनती है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने और दोहरे मापदंडों को अस्वीकार करने पर सहमति बनी। यह सहयोग अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में साझा जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है।

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