बंद पड़ी मिलों को मिलेगा नया जीवन
राज्य सरकार ने सहकारिता विभाग को सकरी और रैयाम चीनी मिलों के पुनः संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है। लंबे समय से बंद रहने के कारण इन क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब मिलों के चालू होने से किसानों को अपने नजदीकी केंद्र पर ही गन्ना बेचने का अवसर मिलेगा।
2401 गांवों से होगी गन्ने की आपूर्ति
गन्ना उद्योग विभाग ने दोनों मिलों के लिए मधुबनी और दरभंगा जिलों के कुल 2401 गांवों को आरक्षित किया है। इन आरक्षित गांवों से ही पेराई के लिए गन्ना उपलब्ध कराया जाएगा। इससे मिलों को नियमित कच्चा माल मिलेगा और किसानों को सुनिश्चित बाजार।
सकरी चीनी मिल के लिए आरक्षित क्षेत्र
सकरी चीनी मिल को मधुबनी जिले के 686 गांवों और दरभंगा जिले के 697 गांवों से गन्ना मिलेगा। मधुबनी के अंधराठाढ़ी, बबुरही, घोघाडीहा, झंझारपुर, लदनिया, लखनौर, लौकहा, लौकही, मधेपुर, पंडौल, फुलपरास और राजनगर प्रखंड के गांव इसमें शामिल हैं। वहीं दरभंगा के बहरी, मनीगाछी, टारडीह, अलीनगर, बेनीपुर, बिरौल, घनश्यामपुर, गौराबौराम, किरतपुर, कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान (पूर्वी) और दरभंगा प्रखंड के गांव भी आरक्षित किए गए हैं।
रैयाम चीनी मिल के लिए आरक्षित क्षेत्र
रैयाम चीनी मिल के लिए दरभंगा जिले के बहादुरपुर, हायाघाट, हनुमाननगर, जाले, सिंहवाड़ा और केवटी प्रखंड के 580 गांव तय किए गए हैं। वहीं मधुबनी जिले के बासोपट्टी, बेनीपट्टी, बिस्फी, हरलाखी, जयनगर, कलुआही, खजौली, रहिका और मधवापुर प्रखंड के 438 गांवों के किसान अपनी उपज यहां बेच सकेंगे।
उच्चस्तरीय समिति की निगरानी
राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और नई मिलों की स्थापना के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है ताकि कार्य समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा हो सके।
किसानों को चार बड़ी राहत
1 .नजदीक में बाजार उपलब्ध – गन्ना बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
2 .समय पर भुगतान की उम्मीद – सहकारिता मॉडल से पारदर्शिता बढ़ेगी।
3 .रोजगार के अवसर – मिलों के चालू होने से स्थानीय युवाओं को काम मिलेगा।
4 .ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती – परिवहन, मजदूरी और अन्य गतिविधियों में तेजी आएगी।
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