दो चरणों में क्यों बन रहा है AMCA?
Mk1: शुरुआती दो स्क्वाड्रन (लगभग 40 विमान) तैयार किए जाएंगे। यह 98 kN थ्रस्ट वाले GE-F414 इंजन से लैस होगा।
Mk2: असली ताकत का प्रदर्शन यहीं से शुरू होगा। लगभग 80 से 120 विमानों की योजना है, जो अधिक शक्तिशाली 120–130 kN श्रेणी के इंजन से उड़ान भरेंगे।
Mk1 बनाम Mk2: क्या होगा बड़ा अंतर?
1. इंजन और ताकत
Mk2 का अधिक शक्तिशाली इंजन उसे भारी हथियारों के साथ भी उच्च प्रदर्शन बनाए रखने में सक्षम करेगा। इससे विमान की मारक क्षमता और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी दोनों बढ़ेंगी।
2. सुपरक्रूज क्षमता
Mk2 बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक गति से उड़ सकेगा। इसे “सुपरक्रूज” कहते हैं। इससे ईंधन की बचत, ज्यादा रेंज और बेहतर स्टेल्थ लाभ मिलेगा।
3. एडवांस टेक्नोलॉजी
Mk2 में AI-आधारित कॉम्बैट सिस्टम शामिल किया जा सकता है, जो युद्ध के दौरान पायलट को रीयल-टाइम निर्णय लेने में मदद करेगा। इसके साथ ही यह भविष्य के UCAVs (मानवरहित लड़ाकू विमानों) को कमांड देने में भी सक्षम हो सकता है।
4. स्टेल्थ और हथियार क्षमता
Mk2 की इंटरनल वेपन्स बे अधिक बड़ी होगी, जिससे ज्यादा मिसाइलें और बम अंदर छिपाकर ले जाए जा सकेंगे। इससे रडार सिग्नेचर कम रहेगा और स्टेल्थ क्षमता बरकरार रहेगी।
स्वदेशीकरण की बड़ी छलांग
Mk2 संस्करण में 90% से अधिक उपकरण स्वदेशी होने की योजना है। इसमें उत्तम AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, स्वदेशी मिसाइलें जैसे Astra Mk3 जैसे सिस्टम शामिल होंगे। यह परियोजना “आत्मनिर्भर भारत” को रक्षा क्षेत्र में नई ऊंचाई दे सकती है।
टाइमलाइन क्या कहती है?
Mk1 का पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में उड़ान भर सकता है। जबकि 2034-35 तक Mk1 का उत्पादन शुरू होने की संभावना है। वहीं Mk2 का बड़े पैमाने पर उत्पादन 2036 के बाद शुरू हो सकता है।

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