क्यों खास है यह पहल?
इस योजना का उद्देश्य किसानों को सिर्फ खेती के लिए प्रोत्साहित करना ही नहीं, बल्कि उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और मार्केटिंग तक पूरी श्रृंखला में सहयोग देना है। सरकार समझती है कि अच्छी पैदावार के साथ-साथ सुरक्षित पैकेजिंग और सही बाजार तक पहुंच भी उतनी ही जरूरी है। इसी कारण स्ट्रॉबेरी की पैकेजिंग सामग्री पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
खेती पर भी मिल रही है मदद
योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 3,02,400 रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जो कुल लागत का 40 प्रतिशत है। यह राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। स्ट्रॉबेरी एक कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है, जिससे किसानों को जल्दी आमदनी मिलती है। साथ ही इसकी मांग शहरी बाजारों, होटलों और प्रोसेसिंग उद्योगों में लगातार बढ़ रही है।
आय बढ़ाने का सुनहरा मौका
स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में ज्यादा मुनाफा दे सकती है। वैज्ञानिक तरीके से खेती, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और उचित देखभाल से कम जमीन में भी अच्छी पैदावार संभव है। पैकेजिंग पर अनुदान मिलने से उत्पाद की बर्बादी कम होगी और दूर-दराज के बाजारों तक आसानी से पहुंच बनाई जा सकेगी।
कौन उठा सकता है लाभ?
इस योजना का लाभ वही किसान ले सकते हैं जो बिहार के निवासी हों, जिनके पास वैध किसान पंजीकरण हो और जिनका बैंक खाता आधार से लिंक हो। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
आवेदन के लिए वेबसाइट: https://horticulture.bihar.gov.in/

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