अंतरिम समझौते की तैयारी
इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा तैयार की थी। इसे अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार 23 फरवरी से तीन दिन तक वॉशिंगटन में बैठक करेंगे। इस समझौते का उद्देश्य न केवल व्यापार को बढ़ाना है, बल्कि महत्वपूर्ण खनिजों और उच्च-तकनीकी उत्पादों की सप्लाई चेन को मज़बूत करना भी है।
पैक्स सिलिका में भारत की एंट्री
भारत अब अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में भी शामिल हो गया है। यह गठबंधन सेमीकंडक्टर और एआई सप्लाई चेन में चीन के दबदबे को कम करने के लिए बनाया गया है। इस कदम से अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग गहरा होगा, जबकि चीन इसे अपने लिए चुनौती के रूप में देखेगा।
व्यापारिक लाभ और टैरिफ में राहत
अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ को घटाएगा। उदाहरण के लिए, भारतीय उत्पादों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% किया जाएगा। रूस से कच्चे तेल की खरीद पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को भी खत्म किया जा रहा है। इससे परिधान, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-गहन उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी। गोयल ने कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और कई व्यवसायों की गति बढ़ेगी।
चीन और रूस की क्या होगी प्रतिक्रिया
रूस भारत के पुराने सहयोगी के रूप में इसे संतुलित कदम के रूप में देखेगा। वह मानता है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्ता को बनाए रखेगा और अमेरिका के पाले में पूरी तरह नहीं जाएगा। वहीं, चीन इस साझेदारी को चुनौती के रूप में देख रहा है। उसे डर है कि भारत अमेरिका के साथ मिलकर सीमा और आर्थिक मोर्चे पर चीन के दबदबे को चुनौती दे सकता है।
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