वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये मिलती है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर यह बढ़कर 54,000 से 58,500 रुपये तक हो जाए। बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए यह कदम कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी राहत साबित हो सकता है।
फिटमेंट फैक्टर क्या है?
फिटमेंट फैक्टर वह विशेष गुणांक है जिससे पुरानी सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हुई थी। इस बार कर्मचारी प्रतिनिधि इसे 2.86 से 3.25 तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अगर यह लागू होता है, तो न्यूनतम सैलरी सीधे 58,500 रुपये तक पहुंच सकती है।
पेंशनर्स को भी मिलेगा फायदा
सिर्फ काम कर रहे कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि पेंशनर्स को भी इसका लाभ मिलेगा। फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि के अनुसार पेंशन की राशि को भी रिवाइज किया जाएगा, जिससे बुजुर्ग पेंशनर्स को महंगाई के समय में राहत मिलेगी।
भत्तों और डीए में भी बदलाव
सैलरी के साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और महंगाई भत्ते (DA) में भी सुधार की उम्मीद है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार मार्च 2026 में DA बढ़कर लगभग 63% तक हो सकता है। हालांकि, आयोग की सिफारिशें लागू होने तक पुरानी दरें ही लागू रहेंगी।
25 फरवरी को होगी अहम बैठक
8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया को गति देने के लिए 25 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इसमें कर्मचारी संगठनों की कमेटी अपनी पूरी मांग सूची सरकार के सामने पेश करेगी। इस चर्चा में न केवल बेसिक सैलरी, बल्कि भत्ते, पेंशन और अन्य सुविधाओं पर भी विचार होगा।
केंद्र सरकार का होगा अंतिम निर्णय
आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इसके बाद सरकार बजट और देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला लेगी। फिटमेंट फैक्टर तय करेगा कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में कितनी वृद्धि होगी।

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