1. 100 नई स्मार्ट टाउनशिप का लक्ष्य
प्रदेश में 100 नई टाउनशिप विकसित करने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया गया है। हाल ही में 114 प्रस्तावों को स्वीकृति मिल चुकी है। इन टाउनशिप को आधुनिक आधारभूत ढांचे, बेहतर सड़क नेटवर्क, जल निकासी, हरित क्षेत्र और डिजिटल सुविधाओं से लैस किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य अनियोजित शहरीकरण की जगह सुव्यवस्थित और ‘स्मार्ट’ विकास मॉडल लागू करना है।
2. नक्शा पास कराने की अनिवार्यता में बड़ी राहत
नगरीय विकास प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय प्लॉट पर निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं। 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भूखंड के लिए भी केवल पंजीकरण पर्याप्त। 500 वर्ग मीटर तक के आवासीय भूखंड के लिए ऑनलाइन स्वतः मानचित्र अनुमोदन प्रणाली लागू। इस फैसले से छोटे व्यापारियों, मध्यम वर्गीय परिवारों और आम नागरिकों को अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति मिलेगी और समय व धन दोनों की बचत होगी।
3. मेट्रो और ‘नमो भारत’ से तेज कनेक्टिविटी मिलेगी
प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं लखनऊ मेट्रो के चारबाग से बसंत कुंज चरण के लिए 1268 करोड़ रुपये का प्रावधान। नमो भारत (रैपिड रेल) के माध्यम से मेरठ से दिल्ली की दूरी 40–45 मिनट में तय होगी। मेरठ में नमो भारत और मेट्रो के दो अलग कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। इससे न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
4. एक्सप्रेसवे किनारे औद्योगिक क्लस्टर और निवेश
प्रदेश के 27 एक्सप्रेसवे के आसपास इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए 12,500 एकड़ का नया लैंड बैंक तैयार किया जा रहा है, जबकि 75,000 एकड़ भूमि पहले से उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रोजेक्ट जमीन पर उतर रहे हैं।
5. श्रमिक कल्याण और युवाओं का डिजिटल सशक्तीकरण
कोविड काल में लौटे 40 लाख श्रमिकों में से अधिकांश को प्रदेश में ही रोजगार उपलब्ध कराया गया है। वहीं, 'स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना' के तहत युवाओं को टैबलेट वितरित करने के लिए 2375 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की योजना है।
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