इससे पहले जनवरी में यह रिकॉर्ड 723.774 अरब डॉलर पर था। हाल ही में 6 फरवरी को समाप्त सप्ताह में यह भंडार घटकर 717.06 अरब डॉलर रह गया था, लेकिन अब इसमें मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। इस ऐतिहासिक उछाल से भारत वैश्विक वित्तीय मानचित्र पर अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है और यह देशवासियों के लिए निश्चित रूप से खुशखबरी साबित हुई है।
आंकड़ों की दिलचस्प बातें
1 .विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 3.55 अरब डॉलर का इजाफा हुआ, जो कुल 573.60 अरब डॉलर पर पहुँच गया। इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं का मूल्य परिवर्तन शामिल है।
2 .स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) में 4.99 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 128.46 अरब डॉलर पर पहुँच गया।
3 .विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में 10.3 करोड़ डॉलर का इजाफा हुआ, जो अब 18.92 अरब डॉलर है।
4 .अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत का आरक्षित भंडार 1.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.734 अरब डॉलर हो गया।
जानकारों का कहना है कि यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है। बढ़ती विदेशी मुद्रा भंडार से न केवल देश की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है, बल्कि यह निवेशकों के लिए भी भरोसे का संकेत देती है।

0 comments:
Post a Comment