यूपी सरकार का नया फरमान: हर कर्मचारी के लिए अनिवार्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नई दिशा में कदम बढ़ाया है। योगी सरकार ने राज्य के 63 विभागों के 17 लाख से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय 'मिशन कर्मयोगी भारत' के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य सरकारी नौकरशाही को स्मार्ट और हाइटेक बनाना है।

तकनीकी दक्षता का अनिवार्य होना

12 फरवरी 2026 को इस संबंध में जारी किए गए आदेश में स्पष्ट किया गया कि अब तकनीकी दक्षता किसी कर्मचारी के लिए वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य होगी। AI के बुनियादी प्रशिक्षण को लेकर सरकार ने सभी कर्मचारियों से अपेक्षा की है कि वे 'कर्मयोगी भारत' पोर्टल पर पंजीकरण कर, तीन पाठ्यक्रमों में से कम से कम "AI का परिचय" कोर्स पूरा करें। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को डिजिटल और तकनीकी रूप से तैयार करना है ताकि वे सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकें।

कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की भूमिका

सरकार ने इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए 'कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन' का गठन किया है। यह कमीशन तकनीकी प्रशिक्षण के लिए एक उपयुक्त पाठ्यक्रम तैयार करेगा, ताकि सरकारी कामकाज में तेजी और दक्षता आए। इसी कड़ी में, आवास विभाग ने भी अपने स्तर पर एक प्रदेश स्तरीय कमीशन स्थापित किया है, ताकि विभाग के भीतर डिजिटल क्षमताओं का विस्तार तेजी से हो सके।

AI का प्रभाव सरकारी कार्यों पर

उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि AI शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सरकारी फाइलों के निस्तारण से लेकर जनशिकायतों के समाधान तक में किया जा सकता है। AI की मदद से यह पता लगाना भी आसान होगा कि किस विभाग में शिकायतें लंबित हैं और उनके समाधान में किस कारण से देरी हो रही है।

AI के जरिए डेटा विश्लेषण में भी मदद मिलेगी, जिससे प्रशासन को निर्णय लेने में अधिक पारदर्शिता और सटीकता मिलेगी। इससे स्मार्ट वर्किंग की दिशा में कदम बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो केवल कागजी कार्य को खत्म कर, अधिक डिजिटल और तेजी से काम करने की स्थिति तैयार करेगा।

0 comments:

Post a Comment