1 .किसानों को मिलेगा मुफ्त मिनीकिट और प्रशिक्षण
रबी सीजन 2025-26 के अंतर्गत सरकार ने 92,518 निःशुल्क मिनीकिट वितरित करने का लक्ष्य तय किया है। इन मिनीकिट्स में दलहनी फसलों के उन्नत बीज शामिल होंगे, जिससे किसानों को गुणवत्ता युक्त बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा, किसानों को खेती की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराने के लिए 8385 किसान पाठशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन पाठशालाओं के माध्यम से उन्नत कृषि विधियों, जैविक खेती, बीज शोधन और कीट नियंत्रण के बारे में जानकारी दी जाएगी।
2 .अनुदान आधारित योजनाएं और प्रोत्साहन
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए अनुदान आधारित योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। उदाहरण के लिए: प्रति एकड़ ₹4000 का अनुदान किसानों को दिया जा रहा है ताकि वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना सकें।
दलहनी बीजों पर विशेष अनुदान: 10 वर्ष से कम पुराने बीजों पर ₹5000 प्रति कुंतल, 10 वर्ष से अधिक पुराने बीजों पर ₹2500 प्रति कुंतल
प्रदर्शन आधारित सहायता: क्लस्टर प्रदर्शन के लिए ₹9000 प्रति हेक्टेयर, फसल पद्धति प्रदर्शन पर ₹15,000 प्रति हेक्टेयर। यह सारा अनुदान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों के खातों में सीधे स्थानांतरित किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध लाभ सुनिश्चित हो सके।
3 .जैविक कृषि और मृदा उर्वरता पर जोर
कृषि विभाग किसानों को जैविक कृषि की ओर भी प्रेरित कर रहा है। राइजोबियम कल्चर के उपयोग से मिट्टी में नाइट्रोजन की स्थिरता बढ़ाई जा रही है, जिससे आगामी फसलों की लागत घटेगी और उत्पादकता में सुधार होगा। इसी तरह, बीज शोधन के लिए जैविक एवं कृषि रक्षा रसायनों का उपयोग बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि बीज जनित व भूमि जनित रोगों से बचाव किया जा सके।
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