इस संबंध में प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब राज्य के 17 प्रमुख शहरों में पांच लाख की औसत आबादी के हिसाब से जोनल कार्यालय बनाए जाएंगे।
आबादी के हिसाब से जोन तय
प्रमुख सचिव के आदेश में कहा गया है कि अब सभी नगर निगमों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 20 लाख से अधिक आबादी वाले शहर, 10 से 20 लाख आबादी वाले शहर, 10 लाख से कम आबादी वाले शहर।
20 लाख से अधिक आबादी वाले शहर
प्रयागराज – 4 जोन, वाराणसी – 4 जोन, आगरा – 4 जोन, गाजियाबाद – 4 जोन, लखनऊ – 8 जोन, कानपुर नगर – 7 जोन
10 से 20 लाख आबादी वाले शहर
गोरखपुर – 3 जोन, मुरादाबाद – 3 जोन, मेरठ – 3 जोन, बरेली – 3 जोन, अलीगढ़ – 3 जोन, मथुरा-वृंदावन – 3 जोन, अयोध्या – 3 जोन
10 लाख से कम आबादी वाले शहर
झांसी – 3 जोन, सहारनपुर – 3 जोन, फिरोजाबाद – 3 जोन, शाहजहांपुर – 3 जोन
अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी
नए जोन निर्धारण के बाद प्रत्येक जोन की कमान सहायक नगर आयुक्त स्तर के अधिकारी को सौंपी जाएगी। इससे न केवल कार्यों की निगरानी आसान होगी बल्कि जनसमस्याओं के समाधान में तेजी आएगी। नगर विकास विभाग का कहना है कि छोटे-छोटे जोनों में बंटी प्रशासनिक व्यवस्था में कभी-कभी समन्वय की दिक्कतें आती थीं। अब बड़े जोन बनाकर जिम्मेदारी स्पष्ट और परिणाम केंद्रित की जाएगी।
शहरी प्रबंधन में आएगी पारदर्शिता
इस निर्णय का मकसद नगर निगमों की कार्यप्रणाली को जनकेंद्रित और कुशल बनाना है। पांच लाख की आबादी के हिसाब से जोन तय करने से न केवल संसाधनों का संतुलित उपयोग संभव होगा, बल्कि सफाई, जलापूर्ति, कर निर्धारण और सड़क रखरखाव जैसे कार्यों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम स्मार्ट सिटी मिशन और नगरीय विकास योजनाओं को और प्रभावी बनाएगा।
कुल मिलाकर 64 नए जोन बनेंगे
नगर विकास विभाग के आदेश के अनुसार, पूरे प्रदेश के 16 प्रमुख शहरों में कुल 64 जोन बनाए जाएंगे। यह विभाजन आने वाले महीनों में लागू किया जाएगा। जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे 10 दिन के भीतर नया जोनल प्रस्ताव तैयार कर रिपोर्ट भेजें।

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