भारत-अमेरिका ट्रेड डील के करीब, चीन में बढ़ी बेचैनी!

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई गर्माहट दिख रही है। लंबे समय से रुकी हुई ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों के बीच सकारात्मक प्रगति की खबर है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह मलेशिया में होने वाली आसियान समिट के दौरान मुलाकात हो सकती है, जहाँ इस डील पर अंतिम सहमति बनने की उम्मीद है।

अमेरिकी टैरिफ में राहत की संभावना

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% अतिरिक्त टैरिफ में 15 से 16 प्रतिशत तक की राहत दी जा सकती है। यह राहत भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे भारतीय एक्सपोर्ट सेक्टर को नई ऊर्जा मिल सकती है। यह डील मुख्य रूप से ऊर्जा, कृषि उत्पाद और सॉफ्टवेयर सेवाओं से जुड़ी हुई है। भारत के लिए यह राहत ऐसे समय पर आई है जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, और घरेलू निर्यातकों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

तेल व्यापार भी वार्ता का हिस्सा

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच बातचीत का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा क्षेत्र, खासकर तेल व्यापार से जुड़ा है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल का आयात कुछ कम करे और अमेरिकी तेल एवं गैस की खरीद बढ़ाए। वर्तमान में भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 34% रूस से आयात करता है, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी केवल 10% के आसपास है। संभावना है कि भारत कुछ हद तक रूसी तेल आयात घटाने पर सहमति जताए, लेकिन अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरी निर्भरता में बदलाव नहीं करेगा। बदले में अमेरिका टैरिफ में छूट देकर संतुलन साधने की कोशिश करेगा।

कृषि क्षेत्र में नई डील की तैयारी

बातचीत के एक अन्य पहलू में अमेरिका अपने गैर-जेनेटिकली मॉडिफाइड (Non-GM) मक्का और सोयाबीन को भारतीय बाजार में एंट्री दिलाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि पिछले दो वर्षों में चीन ने उसके मक्के के आयात में भारी कमी कर दी है। 2022 में चीन ने 5.2 अरब डॉलर का अमेरिकी मक्का आयात किया था, जो 2024 में घटकर केवल 331 मिलियन डॉलर रह गया। इससे अमेरिका के कुल मक्का निर्यात में करीब 5 अरब डॉलर की गिरावट आई है। अब अमेरिका भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहा है।

भारत ने रखी अपनी शर्त

भारत ने अमेरिका को संकेत दिया है कि वह गैर-जीएम मक्का आयात का कोटा बढ़ाने पर विचार कर सकता है, लेकिन इस पर 15% आयात शुल्क लागू रहेगा। वर्तमान में भारत का आयात कोटा 0.5 मिलियन टन प्रति वर्ष है। भारत यह कदम अपनी पोल्ट्री फीड, डेयरी और इथेनॉल उद्योगों की बढ़ती मांग को देखते हुए उठा सकता है। सरकार का मानना है कि यदि अमेरिका अपने कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजारों तक सीमित पहुँच चाहता है, तो उसे टैरिफ और सॉफ्टवेयर निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी भारत को राहत देनी होगी।

चीन की बढ़ी चिंता

भारत और अमेरिका के बीच इस संभावित डील से चीन की आर्थिक रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है। एक ओर अमेरिका चीन से दूरी बनाकर भारत के साथ साझेदारी मजबूत कर रहा है, वहीं भारत भी अपनी व्यापारिक नीतियों में विविधता लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह डील पूरी होती है, तो यह एशियाई आर्थिक संतुलन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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