यूपी में 'शिक्षकों' के लिए खुशखबरी, मिलेगी बेहतर सुविधाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने उन शिक्षकों को शहरी संवर्ग में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो अब विस्तारित नगर सीमाओं में आने वाले विद्यालयों में कार्यरत हैं। इस कदम से हजारों शिक्षकों को नई तैनाती और बेहतर सुविधाओं का अवसर मिलेगा, साथ ही नगरीय क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी भी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।

46 जिलों के 1812 स्कूल होंगे शामिल

प्रदेश के कुल 46 जिलों में स्थित 1812 परिषदीय विद्यालयों को अब नगरीय सीमा में जोड़ा गया है। इन स्कूलों में फिलहाल 692 प्रधानाध्यापक, 5324 सहायक अध्यापक, 1893 शिक्षामित्र और 568 अनुदेशक कार्यरत हैं। वर्षों से इन शहरी क्षेत्रों में नई नियुक्तियाँ न होने के कारण शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई थी, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात बिगड़ गया था।

शिक्षकों से ली जाएगी सहमति

शासनादेश के अनुसार, जिन विद्यालयों को नगरीय क्षेत्र में शामिल किया गया है, वहाँ के शिक्षकों से लिखित सहमति ली जाएगी। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से शहरी संवर्ग में समायोजित किया जाएगा। यह प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शिक्षकों को जल्द लाभ मिल सके। हालांकि, समायोजन के बाद इन शिक्षकों की वरिष्ठता शहरी संवर्ग में सबसे नीचे मानी जाएगी। यानी वे वहाँ के पहले से कार्यरत शिक्षकों की तुलना में जूनियर स्तर से शुरुआत करेंगे।

अनिश्चितता खत्म, व्यवस्था स्पष्ट

शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि इस निर्णय के अनुरूप शिक्षकों का संवर्ग निर्धारण, वेतनमान और सेवा शर्तों से जुड़ी कार्यवाही जल्द पूरी की जाए। इससे शिक्षकों के बीच किसी प्रकार का भ्रम नहीं रहेगा और उनके भविष्य से जुड़ी अनिश्चितता खत्म होगी। इससे नगरीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूरी होगी। ग्रामीण शिक्षकों को शहरों में काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका अनुभव और पहुंच दोनों बढ़ेगी।

नगरीय क्षेत्र में भर्ती की स्थिति

राज्य में वर्ष 1981 की बेसिक शिक्षा शिक्षक सेवा नियमावली के तहत ग्रामीण और शहरी संवर्ग अलग-अलग हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो नियुक्तियाँ नियमित रूप से होती रहीं, लेकिन शहरी स्कूलों में कई वर्षों से नई भर्तियाँ नहीं हुईं। 2011 में कुछ ग्रामीण शिक्षकों का शहरी क्षेत्रों में समायोजन किया गया था, लेकिन उसके बाद यह प्रक्रिया रुक गई। कई शहरी विद्यालय आज भी शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं। परिणामस्वरूप, छात्र संख्या में गिरावट आई और कई स्कूल बंद होने की कगार पर पहुँच गए।

किन जिलों को मिला लाभ

यह योजना लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, अयोध्या, बरेली, मथुरा, गाजियाबाद, अलीगढ़, जौनपुर, बस्ती, कुशीनगर, हमीरपुर, बांदा, बुलंदशहर, हरदोई, बदायूं समेत 46 जिलों के विद्यालयों पर लागू होगी।

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