त्योहारी सीजन में नहीं मिली राहत
इस बार उम्मीद की जा रही थी कि दिवाली से पहले आयोग की प्रक्रिया में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि अभी यह मामला विचाराधीन है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में बताया था कि इस पर राज्य सरकारों के साथ गहन चर्चा जारी है और अंतिम निर्णय के लिए कुछ समय और लग सकता है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार इस बार आयोग के गठन से पहले व्यापक विचार-विमर्श करना चाहती है ताकि सभी पक्षों को साथ लिया जा सके।
आठवां वेतन आयोग क्या करेगा?
इस आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन प्रणाली की व्यापक समीक्षा करना है। यह महंगाई और जीवनयापन की लागत को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों के लिए एक संतुलित और न्यायसंगत वेतन संरचना तैयार करेगा।
फिटमेंट फैक्टर: वेतन और पेंशन
वेतन निर्धारण में फिटमेंट फैक्टर एक अहम भूमिका निभाता है। यह वह गुणांक है जिससे मौजूदा बेसिक पे को गुणा कर नया वेतन निकाला जाता है। सातवें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था। उस समय न्यूनतम वेतन ₹18,000 और न्यूनतम पेंशन ₹9,000 तय की गई थी। सूत्रों की मानें तो इस बार सरकार फिटमेंट फैक्टर को 1.92 से लेकर 2.08 के बीच रखने पर विचार कर रही है: फिटमेंट फैक्टर 1.92 होने पर न्यूनतम वेतन ₹34,560 और पेंशन ₹17,280 तक जा सकती है। अगर यह 2.08 होता है, तो न्यूनतम वेतन ₹37,440 और पेंशन ₹18,720 तक पहुंच सकती है।
कब से लागू हो सकता है नया वेतन आयोग?
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2026 से पहले लागू होना मुश्किल है। चूंकि अभी तक आयोग का औपचारिक गठन नहीं हुआ है, इसलिए समीक्षा प्रक्रिया और रिपोर्ट तैयार होने में समय लगेगा। आमतौर पर एक वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में 12-18 महीने का समय लगता है।

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