भारत के लिए खुशखबरी, अमेरिका को झटका!

नई दिल्ली। दुनिया भर में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर रुझान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इस दौड़ में भारत ने एक नई रफ्तार पकड़ ली है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता में बड़ी छलांग लगाने जा रहा है, जबकि अमेरिका इस दिशा में पिछड़ता दिखाई दे रहा है।

भारत की तेज़ रफ्तार: सौर और जलविद्युत परियोजनाएं बनी ताकत

IEA ने भारत की ऊर्जा नीति और उसके ज़मीन पर होते क्रियान्वयन को सराहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं की नीलामी में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जिससे लागत घट रही है और उत्पादन बढ़ रहा है। इसके साथ ही, घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें सब्सिडी तथा तकनीकी सहायता प्रदान कर रही हैं।

इसके अलावा, जलविद्युत परियोजनाओं को भी तेज़ी से मंजूरी मिल रही है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति में और मजबूती आई है। आने वाले पांच वर्षों में भारत की रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता ढाई गुना तक बढ़ने का अनुमान है। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है, तो भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हरित ऊर्जा बाजार बन सकता है।

अमेरिका को झटका: नीति बदलावों ने रोकी प्रगति

वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में स्थिति ठीक इसके उलट होती दिख रही है। IEA का मानना है कि अमेरिका में हरित ऊर्जा की संभावनाएं अब पहले की तुलना में आधी रह गई हैं। इसका मुख्य कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में की गई नीतिगत कटौतियां हैं।

ट्रम्प प्रशासन ने स्वच्छ ऊर्जा पर मिलने वाले टैक्स क्रेडिट को समय से पहले बंद कर दिया, जिससे निवेशकों और डेवलपर्स की रुचि कम हो गई। इसके अलावा, विदेशों से रिन्यूएबल एनर्जी उपकरणों के आयात पर पाबंदियां और समुद्री पवन ऊर्जा (ऑफशोर विंड) परियोजनाओं पर रोक ने अमेरिका के ग्रीन एनर्जी क्षेत्र को बड़ा झटका दिया है।

IEA का वैश्विक आकलन और भारत की भूमिका

IEA के अनुसार, 2024 के अंत तक दुनिया की कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में लगभग 4,600 गीगावाट की वृद्धि हो सकती है। हालांकि यह आंकड़ा पहले के अनुमान से थोड़ा कम है, लेकिन भारत, यूरोप और कुछ अन्य देशों की भागीदारी इस कमी को पूरा करने की दिशा में आशाजनक है। भारत को लेकर एजेंसी ने विशेष रूप से विश्वास जताया है कि यह देश अपने निर्धारित 2030 के ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के बेहद करीब है।

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