चीन के ‘रेयर अर्थ’ प्रतिबंध का जवाब
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह प्रस्ताव चीन द्वारा हाल ही में लगाए गए रेयर अर्थ एक्सपोर्ट कंट्रोल के प्रतिकार के रूप में देखा जा रहा है। चीन विश्व में दुर्लभ धातुओं का सबसे बड़ा उत्पादक है, जिनका उपयोग आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लेकर रक्षा तकनीक तक में किया जाता है। ऐसे में यदि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सॉफ्टवेयर वाले उत्पादों पर नियंत्रण लागू करता है, तो यह दोनों देशों के बीच व्यापारिक टकराव को और गहरा कर सकता है।
अभी शुरुआती दौर में है प्रस्ताव
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल यह योजना शुरुआती स्तर पर है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। कुछ अमेरिकी अधिकारी संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि वैश्विक बाजार पर अनिश्चितता का असर न पड़े। हालांकि, यह स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन चीन के प्रति अपने रुख को पहले से कहीं अधिक कड़ा करने की दिशा में बढ़ रहा है।
ट्रंप का “क्रिटिकल सॉफ्टवेयर” बयान
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अमेरिका जल्द ही उन सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और उत्पादों के निर्यात पर नियंत्रण लगाएगा जिनका निर्माण अमेरिकी तकनीक से हुआ है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि 1 नवंबर से चीन को भेजी जाने वाली वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। इस बयान के बाद अमेरिकी शेयर बाज़ारों में गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल है।
भारत-अमेरिका रिश्तों में नई गर्माहट
इसी बीच भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों में तेजी आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हाल ही में हुई बातचीत को अहम माना जा रहा है। ट्रंप ने न केवल भारत के साथ अपने “गहरे रिश्ते” की बात दोहराई, बल्कि दोनों देशों के बीच संभावित ट्रेड डील का भी ज़िक्र किया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के अधिकारी एक ऐसे समझौते के करीब हैं, जिससे भारत पर लागू 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ घटकर लगभग 15-16 प्रतिशत तक आ सकता है। इस कदम को दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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