बिहार में किसकी सरकार? सर्वे ने सबको चौकाया

पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मी चरम पर है। राजनीतिक दलों की रणनीतियों, सर्वेक्षणों और दावों ने राज्य की राजनीति को बेहद दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। सीट बंटवारे से लेकर नेतृत्व के सवाल तक, हर मोर्चे पर नए समीकरण बनते-बिगड़ते दिख रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार चुनाव सिर्फ एनडीए और महागठबंधन के बीच नहीं, बल्कि एक तीसरी ताकत के रूप में उभरती जनसुराज पार्टी की मौजूदगी से भी खासा दिलचस्प हो गया है।

प्रशांत किशोर की एंट्री से सियासी संतुलन बिगड़ा

सी-वोटर के अनुसार प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जनसुराज पार्टी को नज़रअंदाज़ करना अब किसी के लिए आसान नहीं रहा। वे 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं और 51 उम्मीदवारों की सूची पहले ही जारी कर दी गई है। सर्वे में यह भी सामने आया कि एनडीए पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से जनसुराज को 22.4% लोगों का समर्थन मिल रहा है, जबकि 33.6% लोगों ने कहा कि इससे महागठबंधन को फायदा होगा।

नीतीश कुमार की लोकप्रियता में गिरावट

सर्वे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वे में तेजस्वी यादव (36.2%) सबसे आगे हैं, जबकि प्रशांत किशोर (23.2%) और नीतीश कुमार (15.9%) उनसे पीछे हैं। यह संकेत है कि जनता अब नए विकल्पों की तलाश में है।

युवाओं और नए वोटर्स का रुझान

सी-वोटर एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बदलाव को लेकर भी मत विभाजित हैं। 46.1% लोग मानते हैं कि इसका सबसे ज्यादा फायदा एनडीए को होगा। वहीं, रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर 36.5% लोग महागठबंधन को बेहतर समाधानकर्ता मानते हैं, जबकि 34.3% लोग एनडीए को।

प्रवासी वोटर्स की भूमिका अहम

सी-वोटर के अनुसार त्योहारों के दौरान राज्य में आने वाले प्रवासी मतदाता भी इस बार चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। सर्वे में 65.8% लोगों ने कहा कि उनके परिजन छुट्टियों के दौरान रुककर वोट डालेंगे। यह एनडीए और विपक्ष, दोनों के लिए निर्णायक हो सकता है।

राहुल गांधी की यात्रा से फायदा?

राहुल गांधी की 'वोट अधिकार यात्रा' को लेकर 51% लोगों का मानना है कि इससे महागठबंधन को फायदा हो सकता है। यह यात्रा कांग्रेस को बिहार में पुनर्जीवित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

वोटिंग का आधार: मुद्दे या छवि?

सर्वे में एनडीए समर्थकों में 23.6% लोग प्रत्याशी की छवि को प्राथमिकता देंगे, जबकि 29% पार्टी की विचारधारा को और 26.5% लोग रोजगार व भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को अहमियत देंगे। विपक्षी समर्थकों में इन मुद्दों को लेकर प्राथमिकता और भी स्पष्ट है 37.1% वोटर मुद्दों के आधार पर वोट करने की बात कह रहे हैं।

नीतीश रहेंगे या नहीं?

अगर एनडीए सत्ता में लौटती है तो क्या नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे, इस पर भी मत बंटा हुआ है। 63.3% एनडीए समर्थकों को भरोसा है कि नीतीश ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे, जबकि विपक्ष के 59.8% समर्थकों को इस बात पर संदेह है।

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