घरेलू बचत में हो रहा है बड़ा बदलाव
भारत में बचत के स्वरूप में पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव आए हैं। पारंपरिक बैंक जमा और नकद बचत से हटकर अब भारतीय परिवार तेजी से कैपिटल मार्केट, पेंशन योजनाओं और निवेश योजनाओं की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव मुख्य रूप से बेहतर रिटर्न, टैक्स लाभ और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के कारण संभव हो पाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन फाइनेंशियल सेवाओं की बढ़ती पहुँच ने निवेश को अधिक सुलभ और आसान बना दिया है। इससे युवा और मध्यवर्गीय परिवार अपने पैसों को बेहतर तरीके से बढ़ाने में सक्षम हो रहे हैं।
बचत दर में भारत की मजबूती
दुनिया के कई देशों की तुलना में भारत में घरेलू बचत दर ज्यादा है। यह बचत देश के आर्थिक विकास के लिए पूंजी का एक स्थिर स्रोत है। बचत दर की यह मजबूती भारत की ग्रोथ को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 1971-80 में बचत का 50% हिस्सा बैंक जमाओं में था, जो अब घटकर 40% से नीचे आ गया है। नकद बचत की प्रवृत्ति लगभग 10% के आस-पास स्थिर है, जो डिजिटल लेनदेन के बावजूद भी बरकरार है।
आर्थिक विकास की नई राह
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के ताजा अनुमानों के अनुसार, भारत की विकास दर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6.5% से 6.6% के बीच रहने की उम्मीद है। यह अमेरिका और चीन जैसे बड़े आर्थिक महाशक्तियों की तुलना में कहीं अधिक है।
भारत की यह आर्थिक प्रगति मुख्य रूप से घरेलू बचत को उत्पादक क्षेत्रों में निवेश करने की रणनीति से संभव हो रही है। इससे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था बड़ा आकार लेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और जीवन स्तर में सुधार होगा।

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