क्या होता है प्रोस्टेट कैंसर?
प्रोस्टेट कैंसर तब होता है जब प्रोस्टेट ग्रंथि की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत मामूली होते हैं या बिल्कुल नहीं होते, इसलिए इसे "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है। जैसे-जैसे यह बढ़ता है, यह मूत्र मार्ग, पाचन प्रणाली और अन्य अंगों पर प्रभाव डाल सकता है।
क्यों है पुरुषों के लिए खतरनाक?
1 .धीरे-धीरे बढ़ने वाला लेकिन गंभीर: प्रोस्टेट कैंसर आमतौर पर धीरे बढ़ता है, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह हड्डियों, लिवर और लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है।
2 .लक्षणों की अनदेखी: बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन या रुकावट, पीठ या कूल्हों में दर्द जैसे लक्षण अक्सर बढ़ती उम्र या अन्य समस्याओं से जोड़कर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
3 .जांच में देरी: भारतीय समाज में पुरुषों की स्वास्थ्य जांच को लेकर उदासीनता और झिझक के कारण समय पर निदान नहीं हो पाता।
4 .प्रमुख लक्षण: बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में, पेशाब या वीर्य में खून आना, पेशाब करने में कठिनाई, कूल्हे, पीठ या जांघों में लगातार दर्द।
किन पुरुषों को है अधिक खतरा?
50 वर्ष से अधिक आयु वाले, जिनके परिवार में पहले किसी को प्रोस्टेट कैंसर रहा हो, असंतुलित खानपान और मोटापा, धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन करने वाले
कैसे करें बचाव?
50 साल की उम्र के बाद हर पुरुष को साल में एक बार प्रोस्टेट की जांच करानी चाहिए। यदि परिवार में किसी को कैंसर रहा हो तो यह जांच 45 वर्ष से ही शुरू की जानी चाहिए। प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) ब्लड टेस्ट के जरिए कैंसर की शुरुआती संभावना का पता लगाया जा सकता है।

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