2028 तक तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य वैश्विक संस्थाओं की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की मौजूदा GDP करीब 4.18 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि जर्मनी की GDP लगभग 4.86 ट्रिलियन डॉलर पर है। लेकिन अंतर यहीं खत्म नहीं होता। भारत की विकास दर जहां 6.5% से 7.5% के बीच अनुमानित है, वहीं जर्मनी की संभावित ग्रोथ रेट सिर्फ 1.5% के आसपास रह सकती है।
इस गणित के मुताबिक, भारत अगले तीन वर्षों में 6 से 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है, जो उसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बना देगा। यह केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि एक ऐसा मोड़ है जो वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों को भी बदल सकता है।
नए सहयोगी, नई रणनीति
अमेरिका द्वारा टैरिफ नीतियों में सख्ती के बाद भारत ने वैश्विक व्यापार में नए साझेदारों की तलाश शुरू की, और इस प्रयास में उसे न केवल सफलता मिली, बल्कि पुराने सहयोगियों जैसे ब्रिटेन के साथ भी रिश्तों को नए स्तर पर पहुंचाने का मौका मिला। जापान के बाद अब जर्मनी को भी भारत से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने वाली है।
नए भारत की पहचान
यह स्पष्ट है कि भारत अब केवल ‘जनसंख्या का देश’ नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और व्यापार का भी केंद्र बनता जा रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और यह स्थिति उसे अंतरराष्ट्रीय पावर सेंटर के रूप में स्थापित कर रही है।

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