चीन का "कर्ज" संकट गहराया: GDP से तीन गुना ज़्यादा!

न्यूज डेस्क। चीन, जिसे वर्षों से वैश्विक आर्थिक विकास का इंजन माना गया है, अब एक ऐसे आर्थिक मोड़ पर खड़ा है जहां से गिरावट का जोखिम साफ दिखाई देने लगा है। सबसे बड़ा कारण है, उसका आसमान छूता कर्ज। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चीन का डेट-टू-जीडीपी अनुपात 336% तक पहुंच चुका है। यह दर्शाता है कि चीन की अर्थव्यवस्था जितनी कमाई कर रही है, उससे तीन गुना से भी अधिक उसका कर्ज हो चुका है।

कर्ज का विस्फोट: बीते दशक में बेतहाशा बढ़ोतरी

पिछले दस वर्षों में चीन के कुल कर्ज में लगभग 78% की तेजी आई है। इस दौरान सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सरकारी कर्ज और कॉरपोरेट क्षेत्र दोनों ही बड़ी तेज़ी से उधारी पर निर्भर हो गए हैं। गैर-वित्तीय कंपनियों के कर्ज में 142% की वृद्धि हुई है, जबकि सरकारी कर्ज में 93% का इज़ाफा दर्ज किया गया है। इसके अलावा, घरेलू परिवारों और वित्तीय संस्थानों का कर्ज भी लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे यह साफ हो जाता है कि यह संकट केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं है।

रियल एस्टेट बना सबसे बड़ा सिरदर्द

चीन की अर्थव्यवस्था का एक तिहाई हिस्सा रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ा है, लेकिन यही सेक्टर अब उसकी सबसे बड़ी कमजोर कड़ी बन चुका है। कई बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां भारी कर्ज के बोझ तले दब चुकी हैं और समय पर अपने दायित्वों को पूरा करने में असफल रही हैं। निवेशकों का भरोसा टूट रहा है और प्रॉपर्टी बाजार में मंदी का माहौल लगातार गहराता जा रहा है।

क्या चीन ‘जापान 2.0’ बनने जा रहा है?

जापान का उदाहरण अक्सर दिया जाता है जब किसी देश का कर्ज उसकी जीडीपी से ज्यादा हो जाता है। जापान का डेट-टू-जीडीपी अनुपात करीब 264% है, लेकिन वह पिछले कई दशकों से इसे नियंत्रण में रखे हुए है। लेकिन चीन के मामले में स्थिति अलग है। चीन की ग्रोथ की गति अब धीमी हो रही है, उपभोग घट रहा है, युवाओं में बेरोजगारी बढ़ रही है और वैश्विक स्तर पर अमेरिका जैसे देशों के साथ तनाव भी उसकी चुनौतियों को बढ़ा रहा है।

अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध ने डाली और चोट

चीन पहले से ही आर्थिक रूप से लड़खड़ा रहा था, लेकिन अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध ने उसकी कमर लगभग तोड़ दी है। निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था होने के कारण, टैरिफ और प्रतिबंधों ने चीन के व्यापारिक संतुलन को प्रभावित किया है। इससे विदेशी निवेशक भी सतर्क हो गए हैं, और पूंजी का प्रवाह घटता दिख रहा है।

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