अमेरिकी टैरिफ का असर सीमित
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में लगाए गए अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंता थी कि इससे भारत के निर्यात और आर्थिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। लेकिन पहली तिमाही में आई मजबूत आर्थिक वृद्धि ने यह दर्शाया कि भारत इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना कर रहा है। IMF की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव भारत की विकास दर पर सीमित रहेगा, जबकि इसके उलट अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अन्य विकसित देशों की वृद्धि दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
दूसरे देशों की धीमी आर्थिक वृद्धि
IMF की ताजा विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान में हल्का सुधार दिखाया गया है। वहीं, यूरोप और यूके जैसी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक विकास धीमा होने का अनुमान है। यूरो एरिया की ग्रोथ इस वर्ष 1.2% और अगले वर्ष 0.7% रहने की संभावना है, जबकि यूके भी इसी रफ्तार से धीमी वृद्धि की ओर बढ़ रहा है।
चीन की आर्थिक चुनौती
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की बात करें तो, इस वर्ष उसकी विकास दर लगभग 4.9% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की 5% की दर से थोड़ी कम है। चीन का आर्थिक इंजन कई मोर्चों पर दबाव में है और उसे सतत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिका के लिए टैरिफ बना चुनौती
IMF की रिपोर्ट के साथ-साथ पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकनॉमिक्स ने भी इस साल भारत की वृद्धि दर 6.7% और अगले साल 6.6% रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर इस वर्ष मात्र 1.9% और अगले वर्ष 1.7% तक सीमित रहने की संभावना है, जो 2024 के 2.8% के मुकाबले काफी कम है। यह संकेत देता है कि भारत के लिए अमेरिकी टैरिफ अपने ही देश के लिए भारी पड़ सकता है।

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