असम में किसकी बनेगी सरकार? नए सर्वे में बड़ा उलटफेर!

न्यूज डेस्क। असम में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म होता जा रहा है। चुनाव आयोग ने राज्य में मतदान की तारीख का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद सभी राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। इसी बीच आए एक नए ओपिनियन पोल ने असम की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। सर्वे के मुताबिक राज्य में सत्तारूढ़ दल को फिर से बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।

एक सर्वे रिपोर्ट MATRIZE-IANS के अनुसार इस बार भी भारतीय जनता पार्टी राज्य में मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की ओर बढ़ सकती है। वहीं विपक्षी दलों के लिए चुनावी मुकाबला इस बार भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

सर्वे में किसे कितनी सीटें?

ओपिनियन पोल के आंकड़ों के मुताबिक असम की कुल 126 विधानसभा सीटों में से बड़ी संख्या सत्तारूढ़ दल के खाते में जा सकती है। अनुमान के अनुसार भाजपा को करीब 96 से 98 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। वहीं कांग्रेस को लगभग 26 से 28 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को 1 से 5 सीटों का अनुमान लगाया गया है, जबकि अन्य दलों को 1 से 3 सीटें मिल सकती हैं। 

सर्वे के मुताबिक भाजपा को राज्य के कई क्षेत्रों में मजबूत समर्थन मिल रहा है, जबकि विपक्षी दलों के लिए वोटों का समीकरण बनाना मुश्किल दिखाई दे रहा है।

कब होंगे चुनाव और कब आएंगे नतीजे?

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार असम में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में 9 अप्रैल 2026 को कराए जाएंगे। इसके लिए अधिसूचना 16 मार्च 2026 को जारी की जाएगी। उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि 23 मार्च तय की गई है। मतदान के बाद 4 मई 2026 को मतगणना होगी और उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

असम में पिछली बार के क्या रहे थे नतीजे?

अगर पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो 2021 के चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उस चुनाव में भाजपा को 60 सीटें मिली थीं। वहीं कांग्रेस को 29 सीटें, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को 16 सीटें और असम गण परिषद को 9 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कुछ अन्य दल भी सीमित सीटें जीतने में सफल रहे थे।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी सर्वे केवल संभावनाओं का संकेत देते हैं, अंतिम फैसला जनता के वोट से ही होता है। चुनाव के दौरान स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की छवि और गठबंधन की रणनीति भी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

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