इन गतिविधियों से वसूली पर जोर
मुख्यमंत्री के मुताबिक ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, मोबाइल टावर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां पंचायतों के लिए आय का स्रोत बन सकती हैं। इससे पंचायतों की अपनी कमाई बढ़ाने में मदद मिलेगी।
टैक्स से गांवों में सुधरेंगी सुविधाएं
इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल पेयजल, कचरा प्रबंधन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने में किया जा सकता है। यानी पंचायतों के पास स्थानीय विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर है।
पंचायतों को मिलेगा बड़ा फंड
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले पांच वर्षों में 16वें वित्त आयोग के तहत बिहार की पंचायतों को करीब 52 हजार करोड़ रुपये मिलने की बात है। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से करीब 47 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। इस तरह पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, अलग-अलग गतिविधियों पर कर की वास्तविक दर, वसूली की प्रक्रिया और लागू होने की तारीख संबंधित नियमों और प्रशासनिक प्रावधानों से तय होगी।

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