यूपी सरकार का बड़ा आदेश, सभी 75 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्थायी हेलीपैड तैयार करने की योजना को अब नई दिशा दी गई है। जमीन की उपलब्धता में आ रही परेशानी को देखते हुए सरकार ने कॉलेज, सरकारी अस्पताल और अन्य संस्थानों की खाली जमीन का इस्तेमाल करने का रास्ता निकाला है। जिलाधिकारियों को संबंधित संस्थानों से समन्वय कर जमीन उपलब्ध कराने और प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

736 नए हेलीपैड बनाने की तैयारी

लोक निर्माण विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश में 736 नए स्थायी हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही 17 पुराने हेलीपैडों की मरम्मत भी प्रस्तावित है। अभी तक 118 स्थानों के लिए मानक के अनुरूप जमीन उपलब्ध हो चुकी है। इन 118 हेलीपैडों के निर्माण पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।

हर 20 किलोमीटर पर मिलेगी सुविधा

योजना पूरी होने के बाद औसतन हर 20 किलोमीटर के दायरे में एक स्थायी हेलीपैड उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इनका इस्तेमाल वीवीआईपी आवागमन के अलावा आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए किया जा सकेगा। शुल्क देकर निजी हेलीकॉप्टर भी इन सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे।

जमीन के लिए तय हैं कड़े मानक

एक हेलीपैड के लिए करीब 100 मीटर लंबी और 100 मीटर चौड़ी जमीन की आवश्यकता बताई गई है। इसके अलावा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के मानकों के अनुसार पूर्व और पश्चिम दिशा में 250 मीटर तक ऊंचे अवरोध नहीं होने चाहिए। यही वजह है कि कई जगह उपयुक्त जमीन तलाशने में दिक्कत आ रही है।

नई व्यवस्था के तहत जहां सरकारी संस्थानों की खाली जमीन इन मानकों पर खरी उतरेगी, वहां लोक निर्माण विभाग स्थायी हेलीपैड विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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