मोदी-अनवर मुलाकात में हुई चर्चा
12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा एवं सुरक्षा के अलावा व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। दोनों देशों ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। इसके अगले दिन अनवर इब्राहिम ने पुष्टि की कि ब्रह्मोस को लेकर शुरुआती बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि आगे इस मामले को विशेषज्ञ एजेंसियां और मलेशियाई एयर फोर्स देखेगी।
ब्रह्मोस में क्यों है इतनी दिलचस्पी?
ब्रह्मोस भारत और रूस के सहयोग से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली है। इसके विभिन्न संस्करण जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किए जा सकते हैं। मलेशिया के लिए आधुनिक लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता उसकी रक्षा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। दक्षिण चीन सागर से जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों के बीच इस तरह की संभावित खरीद को रणनीतिक नजरिये से भी देखा जा रहा है।
चीन और अमेरिका पर असर?
मलेशिया अगर भविष्य में ब्रह्मोस खरीदने का फैसला करता है, तो इससे दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे चीन या अमेरिका के साथ मलेशिया के रिश्तों में कोई निश्चित बदलाव आएगा। मलेशिया पहले से कई देशों के साथ अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंध बनाए हुए है। ऐसे में ब्रह्मोस पर बातचीत को भारत के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग के एक हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
अभी अंतिम सौदा बाकी
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रह्मोस की खरीद पर अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। मलेशियाई पक्ष को तकनीकी जरूरत, क्षमता और उपयुक्तता का मूल्यांकन करना है। यदि यह प्रक्रिया खरीद के फैसले तक पहुंचती है, तो यह भारत-मलेशिया रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण नया कदम होगा।

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