ज्यादा सोलर सिस्टम वाले गांव आगे
सोलर विलेज चुनने के लिए गांव में लगे और चालू सोलर सिस्टम को आधार बनाया जाएगा। घरों की छतों के अलावा स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे सिस्टम भी इस गणना में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घरों पर लगाए जा रहे रूफटॉप सोलर सिस्टम को भी रैंकिंग में जगह मिलेगी।
सोलर स्ट्रीट लाइट की गिनती नहीं
गांवों में लगी सोलर स्ट्रीट लाइट को इस रैंकिंग का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा। योजना का मुख्य फोकस घरों और जरूरी सार्वजनिक संस्थानों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाना है। बिजली कंपनी का मानना है कि हर गांव को पूरी तरह सौर ऊर्जा पर लाना फिलहाल आसान नहीं है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से सोलर सिस्टम की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पहले भी हो चुका है प्रयोग
बिहार में सोलर गांव की दिशा में पहले भी प्रयोग किए जा चुके हैं। 2014 में जहानाबाद के धरनई गांव में सोलर माइक्रो ग्रिड लगाया गया था। वहीं नालंदा के नूरसराय प्रखंड का डोईया गांव भी सोलर मॉडल गांव के रूप में विकसित किया गया है।
नई रैंकिंग व्यवस्था से गांवों में सौर ऊर्जा को अपनाने की प्रतिस्पर्धा बढ़ने और स्थानीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

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