भारत का ‘लेजर हथियार’ प्लान तैयार! दुश्मन को हवा में मिटाने की तैयारी

नई दिल्ली। भारत अपनी एंटी-ड्रोन क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अगले छह महीने में 30 किलोवाट क्षमता वाले लेजर हथियार के लिए इंडस्ट्री पार्टनर तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया जाएगा। लक्ष्य इस सिस्टम को शुरुआती उत्पादन मॉडल यानी FOPM तक ले जाना है।

5 किलोमीटर तक लक्ष्य साधने की क्षमता

यह ट्रक पर लगाया जाने वाला डायरेक्टेड एनर्जी वेपन खासतौर पर ड्रोन और मानवरहित विमानों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसकी क्षमता करीब 5 किलोमीटर तक लक्ष्य को निशाना बनाने की बताई गई है। सिस्टम एक साथ कई ड्रोन वाले स्वॉर्म से मुकाबला करने के अलावा फिक्स्ड-विंग UAV और निगरानी सेंसर को भी निशाना बना सकता है। लेजर ऊर्जा से लक्ष्य के इलेक्ट्रॉनिक और संवेदनशील हिस्सों को निष्क्रिय किया जा सकता है।

2 और 10 किलोवाट सिस्टम पर भी काम

DRDO अलग-अलग क्षमता वाले लेजर हथियारों पर भी काम कर रहा है। 2 किलोवाट सिस्टम का उत्पादन शुरू होने की जानकारी दी गई है। वहीं 10 किलोवाट सिस्टम को खरीद प्रक्रिया में AoN मिल चुका है और इसकी करीब 1.5 से 2 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने की क्षमता बताई गई है।

ड्रोन चुनौती के बीच बढ़ी अहमियत

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन के इस्तेमाल ने एंटी-ड्रोन सिस्टम की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया। लेजर हथियारों की खासियत यह है कि लक्ष्य पर ऊर्जा सीधे पहुंचाई जाती है, इसलिए हर ड्रोन के लिए अलग इंटरसेप्टर की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता मौसम और लक्ष्य की परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है।

लेजर हथियार में रडार और सेंसर पहले खतरे की पहचान करते हैं, फिर सिस्टम उसका विश्लेषण कर उचित कार्रवाई करता है। इस तरह 30 किलोवाट सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ना भारत की स्वदेशी एयर डिफेंस तकनीक के लिए एक अहम अगला चरण माना जा रहा है।

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