कंपनी के अनुसार कुएं से लगातार गैस का प्रवाह बना हुआ है। फिलहाल इस खोज को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी वास्तविक क्षमता का है। गैस का कुल भंडार कितना है और यहां से नियमित तौर पर उत्पादन किया जा सकेगा या नहीं, इसका पता आगे होने वाले तकनीकी आकलन से चलेगा। इसलिए अभी इसकी व्यावसायिक क्षमता को लेकर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है।
चार कुओं की ड्रिलिंग का हिस्सा
इस अभियान में एमडीडब्ल्यू 28 पहला कुआं है। इसकी खुदाई 25 जुलाई से शुरू की गई थी। करीब 770 मीटर पानी वाले समुद्री क्षेत्र में स्थित यह कुआं 2024 में मिली उत्कल और कोणार्क खोजों के आसपास के क्षेत्र में है। कोणार्क से इसकी दूरी लगभग 23 नॉटिकल मील बताई गई है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस खोज को समुद्र में तेल-गैस तलाशने के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। आसपास मौजूद खोजों के साथ एक ही तरह की सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सके तो भविष्य में परियोजनाओं के विकास में खर्च और समय दोनों घटाने की संभावना है।
गहरे समुद्री क्षेत्र पर बढ़ा फोकस
यह पूरा अभियान ‘समुद्र मंथन’ पहल के तहत महानदी बेसिन के उन हिस्सों में चल रहा है, जहां गहरे समुद्र में संसाधनों का अभी पूरा आकलन नहीं हुआ है। अनुमान के मुताबिक बेसिन के जमीनी हिस्से में करीब 45 मिलियन टन और उथले पानी वाले क्षेत्र में लगभग 100 मिलियन टन संसाधन हैं।
केंद्र ने जुलाई में ‘समुद्र मंथन’ के लिए 84,084 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था। यह कार्यक्रम 2030-31 तक चलना है। सरकार का लक्ष्य इस अभियान के जरिए देश के हाइड्रोकार्बन संसाधनों में 600 मिलियन टन से अधिक की संभावित वृद्धि करना है।
.png)
0 comments:
Post a Comment