केंद्र सरकार का बड़ा कदम, देशभर के मरीजों को मिल सकती है राहत!

नई दिल्ली: अस्पतालों में इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल सामान की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार ने समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है। महाराष्ट्र FDA की जांच में खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जाने वाली कीमतों के बीच बड़े अंतर की बात सामने आने के बाद अब केंद्र स्तर पर अस्पतालों और मेडिकल सेक्टर के साथ बातचीत की जा रही है।

कीमतों के अंतर ने खींचा ध्यान

महाराष्ट्र FDA के सर्वे में कुछ जरूरी मेडिकल सामानों की खरीद कीमत और MRP में काफी बड़ा अंतर पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एक IV सेट करीब ₹11 में खरीदा गया, जबकि उसका MRP ₹325 तक दर्ज था। इसी तरह कुछ सिरिंज और अन्य चीजों में भी उल्लेखनीय अंतर सामने आया।

अब अस्पतालों से होगी बातचीत

इन निष्कर्षों के बाद फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने अस्पतालों की बिलिंग व्यवस्था और मेडिकल चीजों की खरीद लागत को समझने के लिए निजी अस्पतालों के साथ चर्चा शुरू की है। उद्देश्य यह देखना है कि मरीजों पर पड़ने वाले खर्च को अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत बनाने के लिए किस तरह का नियामकीय ढांचा बनाया जा सकता है।

दवाओं और उपकरणों में फर्क

जरूरी दवाओं की कीमतों के लिए पहले से नियामकीय व्यवस्था मौजूद है, लेकिन कई मेडिकल उपकरण और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चीजें उसी तरह की कीमत सीमा के दायरे में नहीं आते। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती यह है कि मरीजों को राहत देने के साथ अस्पतालों की वास्तविक लागत और गुणवत्तापूर्ण इलाज की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए।

मरीजों के लिए क्यों अहम है यह पहल?

अगर आगे चलकर कीमतों को लेकर स्पष्ट नियम या निगरानी व्यवस्था बनती है, तो अस्पताल के बिल में इस्तेमाल होने वाले कई मेडिकल सामानों की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ सकती है। हालांकि, अभी किसी निश्चित मूल्य सीमा या अंतिम नियम की घोषणा नहीं हुई है; फिलहाल सरकार की प्रक्रिया समीक्षा और परामर्श के चरण में है।

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