चीन छोड़ भारत आ रही जापानी कंपनियां! ड्रैगन को बड़ा झटका

नई दिल्ली। चीन में कारोबार कर रही जापानी कंपनियों की संख्या लगातार घट रही है, वहीं भारत उनके लिए नए निवेश और कारोबार के प्रमुख विकल्पों में शामिल हो रहा है। बढ़ती लागत, कमजोर मांग, स्थानीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक तनाव के बीच जापानी कंपनियां अपनी वैश्विक रणनीति में बदलाव कर रही हैं।

चीन में जापानी कंपनियों की संख्या घटी

जापानी रिसर्च फर्म Teikoku Databank के सर्वे के अनुसार जून 2026 में चीन में जापानी कंपनियों की संख्या घटकर 10,118 रह गई। यह 2010 में सर्वे शुरू होने के बाद सबसे कम आंकड़ा है। 2024 से 2026 के बीच करीब 4,137 कंपनियां चीन से बाहर हुईं या उनका कारोबार बंद हुआ, जबकि इस दौरान 1,221 नई कंपनियां वहां आईं।

चीन में मौजूद जापानी कंपनियों में 40 फीसदी से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी हैं। ऐसे में यह बदलाव वैश्विक सप्लाई चेन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

भारत क्यों बन रहा विकल्प?

भारत का बड़ा घरेलू बाजार और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जापानी कंपनियों को आकर्षित कर रही है। यहां कंपनियों को उत्पादन के साथ घरेलू बिक्री और निर्यात के अवसर भी मिलते हैं। जापानी बैंकिंग क्षेत्र की गतिविधियां भी भारत में बढ़ी हैं।

SMBC ने YES Bank में 20 फीसदी हिस्सेदारी करीब 1.6 अरब डॉलर में खरीदी है, जबकि MUFG ने श्रीराम फाइनेंस में 20 फीसदी हिस्सेदारी के लिए करीब 4.45 अरब डॉलर का निवेश किया है। Mizuho की सिक्योरिटीज इकाई ने भी भारतीय निवेश बैंक Avendus में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की है।

ऑटो सेक्टर में भी बढ़ रहा निवेश

भारत में जापानी कंपनियों की मौजूदगी पहले से मजबूत है। करीब 1,400 जापानी कंपनियां देश में कारोबार कर रही हैं और जापान का भारत में एफडीआई 2.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। Toyota, Honda और Suzuki जैसी कंपनियां भी भारत में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं।

हालांकि चीन से निकलने वाला हर जापानी निवेश भारत नहीं आ रहा। अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया भी जापानी कंपनियों के लिए बड़े विकल्प हैं। फिर भी चीन से घटती कारोबारी दिलचस्पी के बीच भारत को इसका एक अहम लाभार्थी बनने का मौका मिल सकता है। 

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