नई दिल्ली। जीएसटी से जुड़े कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए कई अहम बदलावों की तैयारी है। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया, लेकिन रजिस्ट्रेशन, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और माल ढुलाई से जुड़े नियमों को आसान बनाने पर जोर दिया गया। इन कदमों का मकसद कारोबारियों की कागजी कार्रवाई घटाना और टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेज करना है।
1 .कम जोखिम वाले कारोबारियों को 3 दिन में रजिस्ट्रेशन
कम जोखिम वाले आवेदकों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन तीन कार्यदिवस में देने की व्यवस्था जारी रहेगी। जिन कारोबारियों की संबंधित आउटपुट टैक्स देनदारी 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक नहीं है, उन्हें भी इस व्यवस्था का लाभ मिल सकता है। व्यापार नाम या अतिरिक्त कारोबार स्थल जैसी कुछ जानकारियों में बदलाव की प्रक्रिया भी स्वचालित बनाने पर जोर है।
2 .रिफंड मिलने की प्रक्रिया होगी तेज
रिफंड आवेदनों पर निर्णय लेने की समय सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। जोखिम आकलन के आधार पर करीब 90 फीसदी रिफंड राशि को सिस्टम के जरिए मंजूरी देने और आदेश तीन कार्यदिवस में जारी करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे कारोबारियों का पैसा लंबे समय तक अटकने की समस्या कम हो सकती है।
3 .सेवा निर्यात को बढ़ावा देने की तैयारी
विदेशी ग्राहकों के लिए भारत में माल की जांच, मरम्मत, प्रमाणन या प्रोसेसिंग जैसी सेवाओं को निर्यात सेवा का दर्जा देने से जुड़े नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को सेवाएं देने वाली भारतीय कंपनियों को लाभ मिल सकता है।
4 .छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं को राहत
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे राज्यों में सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए रजिस्ट्रेशन आसान बनाने पर जोर दिया गया है। कुछ शर्तों के तहत प्लेटफॉर्म के दूसरे राज्य में मौजूद वेयरहाउस को विक्रेता के कारोबार स्थल के रूप में घोषित करने की सुविधा भी प्रस्तावित है। इससे छोटे विक्रेताओं के लिए देशभर में सामान बेचना आसान हो सकता है।
5 .कर्मचारियों के बीमा पर ITC की सुविधा
कर्मचारियों के स्वास्थ्य और जीवन बीमा सहित कुछ खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट देने से जुड़े प्रावधानों को आगे बढ़ाया गया है। टेलीकॉम टावर, फैक्टरी परिसर के बाहर पाइपलाइन, मुफ्त नमूनों और एक्सपायर्ड स्टॉक जैसे मामलों को लेकर भी नियम स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है।
6 .कुछ सेवाओं पर दोहरे टैक्स से राहत
एक ही कारोबारी लेनदेन में सेवा की दोबारा खरीद-बिक्री होने पर दोहरी कर देनदारी से बचाने के लिए बदलाव किए जा रहे हैं। होटल बुकिंग, रेस्तरां और कैटरिंग तथा यात्री परिवहन जैसी सेवाओं से जुड़े मामलों में इससे राहत मिलने की उम्मीद है।
7 .ईमानदार खरीदारों के ITC पर होगा विचार
कई बार सप्लायर की गलती के कारण खरीदार को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने में परेशानी होती है। इस मुद्दे पर अधिकारियों की समिति बनाई जाएगी, जो तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। इसका उद्देश्य जरूरी शर्तें पूरी करने वाले ईमानदार खरीदारों के हितों की रक्षा करना है।
8 .छोटे कारोबारियों के लिए सालाना रिटर्न का विकल्प
पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले और केवल उपभोक्ताओं को सामान या सेवाएं देने वाले पात्र करदाताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसके तहत साल में एक बार रिटर्न दाखिल करने और हर तिमाही टैक्स भुगतान का विकल्प मिल सकता है। विस्तृत नियमों पर आगे निर्णय होना है।
9 .GST गिरफ्तारी और अभियोजन के नियमों में बदलाव
जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी की शक्ति हटाने, अभियोजन की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने और न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने जैसे बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है। सामान्य पेनल्टी की अधिकतम राशि को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने की भी बात है। इन प्रावधानों की वास्तविक लागू स्थिति आधिकारिक अधिसूचना से जांचना जरूरी है।
10 .माल ढुलाई के दौरान जांच के नियम होंगे सख्त लेकिन सीमित
माल लेकर जा रहे वाहनों को सामान्य रूप से रोकने के बजाय विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर जांच करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके लिए संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर के अधिकारी की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। जांच को माल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले राज्यों तक सीमित रखने का उद्देश्य अनावश्यक देरी कम करना है।
GST दरों में फिलहाल बदलाव नहीं
जीएसटी परिषद की इस बैठक में टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। मुख्य ध्यान कारोबारियों की प्रक्रियागत परेशानियां कम करने, रिफंड तेज करने और नियमों को अधिक स्वचालित बनाने पर रहा।