यूपी के 75 जिलों में देशी अभियान शुरू, सरकार की बड़ी पहल!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष दिवाली से पहले एक अनूठी पहल की जा रही है, जिसका उद्देश्य है स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और स्थानीय कारीगरों व उद्यमियों को एक बड़ा मंच प्रदान करना। 9 से 18 अक्तूबर तक प्रदेश के सभी 75 जिलों में स्वदेशी मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

प्रदेश के सभी स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर से इस अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। इन मेलों का मूल उद्देश्य है दिवाली के बाजार को विदेशी और विशेष रूप से चीनी उत्पादों से मुक्त करना। इसके साथ ही प्रदेश में तैयार किए जा रहे हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, वस्त्र, मिट्टी कला और अन्य स्वदेशी उत्पादों को उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंचाना।

महिला उद्यमियों और कारीगरों को मिलेगा मंच

इस आयोजन में महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, लघु एवं कुटीर उद्योगों, खादी एवं ग्रामोद्योग, हथकरघा, माटी कला, रेशम उद्योग, तथा 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) जैसी योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को निशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए गए हैं। इससे न केवल उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

जीएसटी बचत उत्सव के रूप में भी मनाया जाएगा

इन मेलों को ‘जीएसटी बचत उत्सव’ के रूप में मनाया जा रहा है, जहां उपभोक्ताओं को वस्तुएं उचित मूल्य पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल से लोगों को यह महसूस होगा कि स्वदेशी उत्पाद गुणवत्ता में किसी से कम नहीं हैं, और साथ ही वे सस्ती दरों पर उपलब्ध हैं।

आधुनिक व्यवस्थाओं से युक्त आयोजन

हर जनपद में मेलों का आयोजन व्यावसायिक दृष्टि से उपयुक्त और सुलभ स्थानों पर किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग शामिल हो सकें। उद्योग विभाग और जिला प्रशासन इसके आयोजन में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। सभी मंत्रियों को भी अपने-अपने प्रभार वाले जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे आयोजन को सफल बनाया जा सके।

जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदारी

मेले में वस्तुओं की खरीद के लिए GeM पोर्टल (Government e-Marketplace) का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित किया गया है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और सरकारी विभागों द्वारा सीधे स्थानीय उत्पादकों से खरीद को बढ़ावा मिल सके।

ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को नई दिशा

यह मेला न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को जन-जन तक पहुंचाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के कारीगरों को भी इससे नए बाजार मिलेंगे, जिससे दोनों ही क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई दिशा और रफ्तार मिलेगी।

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