1 .विश्व बैंक ने बढ़ाया भारत की ग्रोथ रेट का अनुमान
विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.3% से बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। यह संशोधन सिर्फ आँकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भारत की स्थिर आर्थिक नीतियों, मजबूत उपभोग और निर्यात में सुधार का प्रमाण है। यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है, जैसे उच्च मुद्रास्फीति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, और भू-राजनीतिक तनाव।
भारत की अर्थव्यवस्था का यह स्थायित्व और विकास दर, वैश्विक निवेशकों और नीति-निर्माताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह भी संकेत करता है कि भारत अब सिर्फ एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद विकास इंजन बनता जा रहा है।
2 .वैश्विक व्यापार में भारत का बढ़ता वर्चस्व
दूसरी बड़ी खबर संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की रिपोर्ट से जुड़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक व्यापार में विकासशील देशों की भूमिका बेहद अहम बनी हुई है और भारत इनमें अग्रणी है। अमेरिका की व्यापार नीतियों में बदलाव के बावजूद भारत की स्थिति स्थिर रही है, बल्कि और मजबूत हुई है।
बीते 12 महीनों में भारत की अमेरिका पर व्यापारिक निर्भरता 0.6% बढ़ी है, जबकि रूस की भारत पर निर्भरता में 0.7% का इजाफा देखा गया। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत अब केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार का नेतृत्व करने वाला देश बनता जा रहा है। UNCTAD ने यह भी बताया कि 2025 की पहली छमाही में, वैश्विक व्यापार में 500 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें विकासशील देशों खासकर भारत की भूमिका बेहद अहम रही है। भारत अब सिर्फ अपनी आंतरिक मांग के कारण नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।
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